Shimla: त्रुटियों को ठीक करने के लिए अतिरिक्त समय देना पूरी तरह वैध : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 28 Sep, 2026 10:35 PM

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हाईकोर्ट ने सरकारी भर्तियों में दस्तावेज सत्यापन को लेकर एक बड़ा सिद्धांत स्पष्ट किया है। जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने निर्णय दिया कि यदि कोई उम्मीदवार विज्ञापन में मांगी गई आवश्यक योग्यता रखता है......

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने सरकारी भर्तियों में दस्तावेज सत्यापन को लेकर एक बड़ा सिद्धांत स्पष्ट किया है। जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने निर्णय दिया कि यदि कोई उम्मीदवार विज्ञापन में मांगी गई आवश्यक योग्यता रखता है, लेकिन उसके प्रमाण पत्रों में कोई तकनीकी त्रुटि या औपचारिकता (जैसे प्रति हस्ताक्षर) छूट गई है तो उसे 'सुधारने योग्य त्रुटि' माना जाएगा। चयन आयोग द्वारा ऐसी त्रुटियों को ठीक करने के लिए अतिरिक्त समय देना पूरी तरह वैध है। राज्य चयन आयोग ने 4 मार्च, 2024 को ग्रुप इंस्ट्रक्टर के 12 पदों के लिए आवेदन मांगे थे।

नियमों के तहत उम्मीदवारों के पास आवश्यक व्यावहारिक अनुभव होना अनिवार्य था। विज्ञापन की चैक लिस्ट में यह शर्त थी कि अनुभव प्रमाण पत्र संबंधित सरकारी प्राधिकारी या विभाग के अधिकारी द्वारा सत्यापित/प्रति हस्ताक्षरित होना चाहिए। दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग ने पाया कि उम्मीदवार प्रदीप के अनुभव प्रमाण पत्र पर लेबर ऑफिसर/इंस्पैक्टर के प्रति हस्ताक्षर नहीं थे। आयोग ने 3 मार्च, 2026 को नोटिस जारी कर प्रदीप सहित अन्य उम्मीदवारों को यह कमी सुधारने के लिए 12 मार्च, 2026 तक का समय दिया।

प्रदीप ने इस अवधि में कमी को दूर कर लिया। वेटिंग लिस्ट में दूसरे स्थान पर मौजूद विशाल कुमार (याचिकाकर्त्ता) ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। उसका तर्क था कि ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि (26 मार्च, 2024) बीत जाने के बाद आयोग किसी उम्मीदवार को प्रमाण पत्र दुरुस्त करने या नया प्रमाण पत्र जमा करने की अनुमति नहीं दे सकता, इसलिए प्रदीप की उम्मीदवारी रद्द की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब उम्मीदवार सभी चरणों को पार कर लेता है तो उसकी उम्मीदवारी को तुच्छ या मामूली त्रुटियों के लिए रद्द नहीं किया जाना चाहिए।

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