Edited By Kuldeep, Updated: 13 Jul, 2026 06:32 PM

वन विभाग में पदोन्नति मिलने के बावजूद करीब 300 डिप्टी रेंजर (उप वन रक्षक) पिछले 9 माह से अधिक समय से अपनी तैनाती का इंतजार कर रहे हैं।
शिमला (भूपिन्द्र): वन विभाग में पदोन्नति मिलने के बावजूद करीब 300 डिप्टी रेंजर (उप वन रक्षक) पिछले 9 माह से अधिक समय से अपनी तैनाती का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें वन रक्षक (फोरैस्ट गार्ड) से पदोन्नत तो कर दिया गया, लेकिन अब तक नई पोस्टिंग नहीं मिली। ऐसे में पदोन्नति मिलने के बावजूद इन कर्मचारियों से अब भी वन रक्षक का ही काम लिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है और उनके मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। लंबे समय तक पदोन्नति के अनुरूप जिम्मेदारी और पदस्थापना नहीं मिलने से कार्य के प्रति उत्साह कम होगा, जिसका असर विभाग की कार्यप्रणाली के साथ-साथ आम लोगों को मिलने वाली सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में यदि अनुभवी कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिरता रहा तो वनों की सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य भी प्रभावित होंगे, साथ ही कार्बन क्रैडिट से जुड़े राज्य के प्रयासों पर भी इसका असर पड़ सकता है। वन विभाग पहले ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। जानकारी के अनुसार विभाग में वन रक्षकों के करीब 850 पद रिक्त हैं। इन रिक्तियों के कारण कई क्षेत्रों में वन सुरक्षा और निगरानी का काम प्रभावित हो रहा है। सरकार ने वन मित्रों की तैनाती जरूर की है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वन मित्र नियमित वन रक्षकों का विकल्प नहीं हो सकते। विभागीय कार्यों, वन अपराधों की रोकथाम, जंगलों की निगरानी और संरक्षण के लिए प्रशिक्षित एवं नियमित कर्मचारियों की आवश्यकता है।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि 850 रिक्त वन रक्षक पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती की जाए तथा पदोन्नत 300 डिप्टी रेंजरों को तत्काल तैनाती दी जाए। इसके अलावा पुरानी व्यवस्था के तहत नियमित भर्ती प्रक्रिया बहाल करने, वन विभाग में आऊटसोर्सिंग की नीति पर रोक लगाने तथा समाप्त किए गए 500 वन रक्षक, 10 उप वन रेंजर और 10 वन रेंजर के पदों को पुनः बहाल करने की भी मांग की गई है। हिमाचल प्रदेश वन रक्षक एसोसिएशन के महासचिव दिनेश शर्मा ने सरकार से पदोन्नत हुए डिप्टी रेंजर को तैनाती देने का आग्रह किया है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।