Edited By Kuldeep, Updated: 10 Sep, 2026 09:27 PM

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि चिट्टे के खिलाफ दूसरे चरण का अभियान 16 सितम्बर से ऊना जिले से शुरू होगा।
शिमला (ब्यूरो): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि चिट्टे के खिलाफ दूसरे चरण का अभियान 16 सितम्बर से ऊना जिले से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने नशे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रदेश में पीआईटी-एनडीपीएस कानून लागू किया गया है। इसके तहत 3 वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में नशा तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के अलावा उनकी संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शिमला में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का पहला साइंस कॉलेज करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा हमीरपुर जिले में एलाइड एंड हैल्थकेयर कॉलेज भी खोला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार मैडीकल छात्रों के लिए भी विदेशों में एक्सपोजर विजिट की व्यवस्था कर रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में डायग्नोस्टिक सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ रही है और बीबीएमबी से हिमाचल को मिलने वाले एरियर के मामले में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष, 2027 तक हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा। गांवों में सीबीएसई स्कूल खोले जा रहे हैं, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। किसानों और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि की गई है। वर्तमान में प्रदेश सरकार की तरफ से गाय का दूध 61 रुपए और भैंस का दूध 71 रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य सरकार दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में करीब 200 करोड़ रुपए प्रदान करने जा रही है। कांगड़ा जिले के ढगवार में डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला मिल्क प्रोसैसिंग प्लांट इस वर्ष अक्तूबर तक तैयार हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष, 2021 में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश का देश में 21वें स्थान था, लेकिन वर्तमान सरकार की तरफ से किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप प्रदेश अब पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 150 सीबीएसई स्कूल खोले हैं और 30 सितम्बर, 2026 तक इन स्कूलों में सभी अध्यापकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। अध्यापकों का चयन पूरी तरह मैरिट के आधार पर किया जा रहा है। इन स्कूलों में भी मौजूदा फीस संरचना के अनुसार ही फीस ली जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों को विदेशों में एक्सपोजर विजिट पर भेज रही है, ताकि वे दुनिया में हो रहे बेहतर कार्यों और आधुनिक व्यवस्थाओं को करीब से देख सकें।