Manimahesh Yatra: मां पार्वती के मायके से नंगे पांव भरमौर पहुंचे शिवभक्त, पवित्र छड़ियाें के साथ डल झील रवाना

Edited By Vijay, Updated: 16 Sep, 2026 06:28 PM

manimahesh yatra

उत्तरी भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि देव परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं का एक जीवंत उदाहरण है। इसी परंपरा को निभाते हुए जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले (भद्रवाह क्षेत्र) से सैकड़ों शिवभक्त पवित्र छड़ी लेकर नंगे पांव भरमौर पहुंचे।

भरमौर (उत्तम): उत्तरी भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि देव परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं का एक जीवंत उदाहरण है। इसी परंपरा को निभाते हुए जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले (भद्रवाह क्षेत्र) से सैकड़ों शिवभक्त पवित्र छड़ी लेकर नंगे पांव भरमौर पहुंचे। इन श्रद्धालुओं की मान्यता है कि वे माता पार्वती के मायके (पीहर) पक्ष से हैं और अपने पूर्वजों की परंपरा को निभाते हुए हर साल भगवान शिव और माता पार्वती को निमंत्रण देने मणिमहेश पहुंचते हैं।

40 वर्षों से लगातार आ रहे यात्रा पर, नंगे पांव तय करते हैं सफर
भद्रवाह से इस प्रमुख छड़ी की अगुवाई कर रहे महंत पन्ना लाल पिछले 40 वर्षों से लगातार इस दुर्गम यात्रा पर आ रहे हैं। महंत पन्ना लाल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर को माता पार्वती का मायका माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब से भगवान शिव का विवाह हुआ है, तब से हमारे पूर्वज इस यात्रा पर आ रहे हैं। हम माता पार्वती को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। यही कारण है कि हम उन्हें न्योता देने के लिए सैंकड़ों किलोमीटर का सफर नंगे पांव तय करते हैं।

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घर से निकलते ही त्याग देते हैं आधुनिक सुख-सुविधाएं
महंत ने यह भी बताया कि यह यात्रा एक कठोर तप की तरह है। घर से निकलते ही वे सभी प्रकार की आधुनिक सुख-सुविधाओं का पूरी तरह से त्याग कर देते हैं और यात्रा पूरी कर जब तक वापस अपने घर नहीं लौट जाते, तब तक इसी कठोर व्रत का पालन करते हैं। इस पवित्र यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश, दोनों सरकारें श्रद्धालुओं के लिए उचित प्रबंध करती हैं।

चौरासी प्रांगण में गूंजे पारंपरिक वाद्ययंत्र, छड़ी लेकर डल झील रवाना
मणिमहेश डल झील की ओर बढ़ने से पहले डोडा जिले से आए इन सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक भरमौर चौरासी मंदिर प्रांगण में अपनी हाजिरी भरी। इस दौरान शिवभक्तों ने अपने पौराणिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर पारंपरिक नृत्य किया, जिससे पूरा चौरासी प्रांगण शिव-पार्वती की भक्ति में लीन नजर आया। नंगे पांव आए श्रद्धालुओं के इन जत्थों ने दो अलग-अलग समूहों में यह परंपरा निभाई। महंत पन्ना लाल और जगदीश ठाकुर की अगुवाई में दोनों दलों ने पहले चौरासी मंदिर की परिक्रमा की और उसके बाद अपनी-अपनी पवित्र छड़ियों के साथ मणिमहेश डल झील के लिए प्रस्थान कर लिया।

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