Mandi News: करसोग पंचायत समिति चुनाव में बड़ा 'खेला', बहुमत के बावजूद BJP के हाथ से फिसली अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी

Edited By Vijay, Updated: 14 Jul, 2026 02:33 PM

karsog panchayat committee election

मंडी जिला के तहत करसोग पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में मंगलवार को एक चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पंचायत समिति में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा समर्थित खेमा दोनों प्रमुख पदों को अपने पास रखने में नाकाम रहा।

करसोग (धर्मवीर): मंडी जिला के तहत करसोग पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में मंगलवार को एक चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पंचायत समिति में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भाजपा समर्थित खेमा दोनों प्रमुख पदों को अपने पास रखने में नाकाम रहा। वहीं, मात्र 4 सदस्य होने के बावजूद कांग्रेस ने शानदार रणनीतिक चाल चलते हुए दोनों पदों पर अपना कब्जा जमा लिया।

भाजपा समर्थित सदस्यों पर ही खेला कांग्रेस ने दांव
चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा खेमे में सेंधमारी करते हुए भाजपा समर्थित सदस्य इशरा मेहता को अध्यक्ष पद के लिए और कली चौहान को उपाध्यक्ष पद के लिए अपना समर्थन दे दिया। यह मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अंततः दोनों उम्मीदवारों ने एक-एक वोट के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। इस अप्रत्याशित नतीजे से जहां भाजपा खेमे में भारी मायूसी है, वहीं कांग्रेस समर्थक इस जीत का जश्न मनाते हुए इसे अपनी रणनीतिक जीत बता रहे हैं।

आंकड़े थे भाजपा के पक्ष में, फिर भी हुआ खेल
सदन के गणित पर नजर डालें तो 15 सदस्यीय करसोग पंचायत समिति में भाजपा की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही थी। चुनाव परिणाम आने के बाद सदन में कांग्रेस समर्थित केवल 4 सदस्य ही निर्वाचित होकर पहुंचे थे। इसके विपरीत भाजपा के पास 10 समर्थित सदस्य थे और एक सदस्य निर्दलीय था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि भारी संख्या बल के कारण भाजपा आसानी से दोनों पद जीत लेगी, लेकिन मतदान के दौरान हुए उलटफेर ने सभी अनुमानों को धराशायी कर दिया।

विफल रही भाजपा की कुनबा बचाने की रणनीति
सूत्रों के अनुसार मतदान से ठीक पहले दोनों दलों ने अपने सदस्यों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए लगातार प्रयास किए थे। भाजपा ने किसी भी प्रकार की टूट-फूट रोकने के लिए विशेष रणनीति भी बनाई थी। इसके बावजूद अंतिम क्षणों में भाजपा की रणनीति फेल हो गई और पूर्ण बहुमत होने के बावजूद पार्टी दोनों महत्वपूर्ण पद गंवा बैठी।

चुराग के बाद करसोग में भी दिखा असर
गौरतलब है कि करसोग से पहले विकास खंड चुराग की पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में भी ऐसे ही अप्रत्याशित राजनीतिक समीकरण देखने को मिले थे। अब करसोग में हुए इस बड़े उलटफेर ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत समिति की राजनीति में केवल संख्या बल ही मायने नहीं रखता, बल्कि ऐन वक्त की रणनीति और समर्थन सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। फिलहाल करसोग पंचायत समिति का यह चुनाव परिणाम पूरे क्षेत्र की राजनीति में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पंचायत समिति के भीतर बना यह नया शक्ति संतुलन किस दिशा में जाता है और आने वाले समय में क्षेत्र के विकास कार्यों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!