Edited By Swati Sharma, Updated: 02 Oct, 2026 11:30 AM

मौसम विभाग ने 6 और 7 अक्टूबर को राज्य के कुछ हिस्सों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने का अनुमान लगाते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है और 5 से 7 अक्टूबर तक बारिश का दौर चलने की संभावना जताई है।
Himachal Weather Update : शिमला मौसम विभाग ने गुरुवार को कहा कि अगले दो से तीन दिनों में हिमाचल प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए हालात अनुकूल हैं। मौसम विभाग ने 6 और 7 अक्टूबर को राज्य के कुछ हिस्सों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने का अनुमान लगाते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है और 5 से 7 अक्टूबर तक बारिश का दौर चलने की संभावना जताई है।
इस साल मॉनसून ने 30 जून को राज्य में दस्तक दी थी। अधिकारियों ने बताया कि 1 जुलाई से 29 सितंबर तक मॉनसून के मौसम में, हिमालयी राज्य में सामान्य 733.4 मिमी बारिश के मुकाबले 652.6 मिमी बारिश हुई, जो 11 प्रतिशत कम है। गुरुवार को शाम 4 बजे तक पिछले 24 घंटों में राज्य में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार, गुरुवार शाम तक बारिश के कारण 46 सड़कें वाहनों की आवाजाही के लिए बंद थीं और आठ बिजली ट्रांसफार्मर खराब हो गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इस मॉनसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 154 लोगों की जान गई है और राज्य को अनुमानित 3,220 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, गुरुवार को शिमला में एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु के नेतृत्व वाली इस टीम ने सितंबर में हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा किया था ताकि बारिश से जुड़ी आपदाओं से हुए नुकसान का आकलन किया जा सके।
प्राकृतिक आपदाओं पर हुई चर्चा
बैठक में उन्होंने मॉनसून के दौरान राज्य में प्राकृतिक आपदाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का असर तेजी से दिखाई दे रहा है और उन्होंने राज्य में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं के कारणों पर वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया। सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार को आपदा राहत सहायता जारी करने के मानदंडों में बदलाव करना चाहिए, क्योंकि पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां मैदानी इलाकों से अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उत्तरी भारत में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने राज्य में राजमार्गों के विकास के दौरान और अधिक सुरंगें बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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