Edited By Kuldeep, Updated: 27 Sep, 2026 09:46 PM

हिमाचल प्रदेश में सितम्बर के अंतिम सप्ताह में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। रविवार को शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिनभर बादल छाए रहे और कई स्थानों पर झमाझम बारिश दर्ज की गई।
शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश में सितम्बर के अंतिम सप्ताह में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। रविवार को शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिनभर बादल छाए रहे और कई स्थानों पर झमाझम बारिश दर्ज की गई। उच्च पर्वतीय व जनजातीय क्षेत्रों में सीजन का पहला हिमपात हुआ है, जिससे पूरे प्रदेश में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ स्पीति वैली के काजा और चिचम में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है। किन्नौर के कल्पा में न्यूनतम तापमान गिरकर 3.8 डिग्री तक पहुंच गया, जो रविवार को प्रदेश में सबसे कम दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को जनजातीय और मध्य पर्वतीय इलाकों में अच्छी वर्षा व हिमपात हुआ। किन्नौर के सांगला में 7 सैंटीमीटर, कल्पा में 5 सैंटीमीटर और पूह में 3 सैंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। मंडी में 21.6, ताबो में 11.5 मिलीमीटर व शिमला के सराहन में 3 सैंटीमीटर, सिरमौर के राजगढ़ में 3 सैंटीमीटर और पांवटा साहिब व कुफरी में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई। ताबो में 48 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण अगले कुछ दिन मौसम खराब रहेगा। सोमवार को किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के लिए बारिश और बर्फबारी का यैलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मंगलवार को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन कोई चेतावनी नहीं है। बुधवार को केवल मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की वर्षा की संभावना है। 1 से 3 अक्तूबर तक पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ और शुष्क रहने का अनुमान है। इसी दौरान राज्य से मानसून की आधिकारिक विदाई भी हो सकती है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार प्रदेश भर में कुल 61 सड़कें अवरुद्ध हैं। इनमें लाहौल-स्पीति में सर्वाधिक 25 सड़कें और मंडी में 19 सड़कें प्रभावित हैं। इसके अलावा नाको से आगे मलिंग नाले के पास पहाड़ से लगातार पत्थर गिरने के कारण रिकांगपिओ-काजा मार्ग पर एहतियातन यातायात रोक दिया गया है। भारी बारिश के कारण राज्य में 137 ट्रांसफार्मर ठप्प हैं। इनमें सबसे अधिक किन्नौर में 59 तथा सिरमौर में 58 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं। राहत की बात यह है कि प्रदेश में किसी भी पेयजल योजना के बाधित होने की सूचना नहीं है।
मानसून सीजन में अब तक सरकारी व निजी संपत्ति को मिलाकर लगभग 3,219.90 करोड़ रुपए का भारी नुक्सान हो चुका है। इसमें लोक निर्माण विभाग को 2,744.67 करोड़ रुपए और जल शक्ति विभाग को 385.67 करोड़ रुपए की क्षति पहुंची है। प्राकृतिक आपदाओं भूस्खलन, डूबने, बिजली गिरने, चट्टान से गिरने आदि के कारण 149 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें सबसे अधिक मौतें शिमला में 23, चम्बा में 22, कांगड़ा में 19, मंडी में 19 और लाहौल-स्पीति में 18 दर्ज की गईं। मानसून अवधि के दौरान हुए सड़क हादसों में अलग से 220 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई है।