Kangra: धर्मशाला में चीन के खिलाफ फूटा तिब्बतियों का गुस्सा, निकाली रोष रैली

Edited By Kuldeep, Updated: 18 Jul, 2026 09:41 PM

dharamshala tibetan protest rally

चीन सरकार द्वारा तिब्बत में लागू किए जा रहे तथाकथित जातीय एकता और प्रगति कानून के खिलाफ शनिवार को धर्मशाला में तिब्बती समुदाय का गुस्सा फूट पड़ा।

धर्मशाला (सुनील): चीन सरकार द्वारा तिब्बत में लागू किए जा रहे तथाकथित जातीय एकता और प्रगति कानून के खिलाफ शनिवार को धर्मशाला में तिब्बती समुदाय का गुस्सा फूट पड़ा। तिब्बती यूथ कांग्रेस और स्टूडैंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत सहित आधा दर्जन प्रमुख संगठनों के आह्वान पर सैंकड़ों तिब्बतियों ने मैक्लोडगंज से लेकर धर्मशाला पुलिस मैदान तक एक विशाल रोष रैली निकाली और चीनी दमनकारी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चीन का यह नया कानून तिब्बत की सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को पूरी तरह खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश है। इस कानून की आड़ में तिब्बती बच्चों और युवाओं को उनकी मूल संस्कृति से दूर कर जबरन चीनी रंग में ढालने का प्रयास किया जा रहा है। पूरी रैली के दौरान तिब्बत की आजादी के समर्थन में और चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।

इस संयुक्त विरोध प्रदर्शन में तिब्बती यूथ कांग्रेस, तिब्बती वूमैन एसोसिएशन, गु-चु-सुम मूवमैंट ऑफ तिब्बत, नैशनल डैमोक्रेटिक पार्टी ऑफ तिब्बत, स्टूडैंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत - इंडिया और इंटरनैशनल तिब्बत नैटवर्क के शीर्ष पदाधिकारी व स्थानीय तिब्बती लोग शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान तिब्बती समुदाय ने तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले देशभक्त शहीद लोबगा रंगजेन के सर्वोच्च बलिदान को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र से मांग की कि वे इस बलिदान को मान्यता दें और तिब्बत में खराब होते मानवाधिकारों पर संज्ञान लें।

चीन बच्चों को संस्कृति से दूर करने का कर रहा प्रयास
वक्ताओं ने कहा कि चीन जातीय एकता के नाम पर तिब्बतियों पर जबरन आत्मसातीकरण की नीति थोप रहा है। इसके जरिए बच्चों को उनकी भाषा और बौद्ध परंपराओं से दूर किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि तिब्बती समुदाय लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।

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