Kangra: धर्मशाला के डॉ. अभिनव ने कैमरे में कैद कीं 600 दुर्लभ पक्षी प्रजातियां

Edited By Kuldeep, Updated: 05 Jul, 2026 07:58 PM

dharamshala rare bird species

धर्मशाला जोनल अस्पताल में तैनात त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव चौधरी ने 25 वर्षों की सतत् मेहनत और प्रकृति के प्रति समर्पण से हिमाचल प्रदेश में पक्षियों की 600 प्रजातियों और 25 उप-प्रजातियों को अपने कैमरे में कैद कर एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है।

धर्मशाला (सुनील): धर्मशाला जोनल अस्पताल में तैनात त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव चौधरी ने 25 वर्षों की सतत् मेहनत और प्रकृति के प्रति समर्पण से हिमाचल प्रदेश में पक्षियों की 600 प्रजातियों और 25 उप-प्रजातियों को अपने कैमरे में कैद कर एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2017 में वन विभाग द्वारा प्रदेश में 672 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई थीं, ऐसे में डॉ. चौधरी का यह संग्रह हिमाचल की जैव विविधता का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। उन्होंने बिना किसी आधुनिक मोबाइल ऐप या सोशल मीडिया की सहायता के केवल दूरबीन और कैमरे के सहारे यह मुकाम हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने पक्षियों पर 60 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित किए और प्रदेश में लगभग 30 नए पक्षी रिकॉर्ड भी दर्ज किए हैं।

बर्फीली चोटियों से लेकर जंगलों तक की खाक छानी
दुर्लभ पक्षियों की तलाश में डॉ. चौधरी ने लाहौल-स्पीति, पांगी, ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क, सिरमौर के जंगलों और पौंग बांध क्षेत्र सहित प्रदेश के लगभग हर हिस्से का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने रैड क्रॉसबिल, तिब्बती सैंडग्राउज, हुडेड पिट्टा और पाइड थ्रश जैसे दुर्लभ पक्षियों की तस्वीरें कैमरे में कैद कीं।

एक पक्षी के लिए एक दिन में तय किया 500 किलोमीटर का सफर
डॉ. अभिनव ने बताया कि कई बार एक दुर्लभ पक्षी की झलक पाने के लिए उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। यलो-ब्रेस्टेड बंटिंग की तस्वीर लेने के लिए उन्होंने एक ही दिन में 500 किलोमीटर से अधिक का सफर तय किया, जबकि राज्य पक्षी वेस्टर्न ट्रैगोपन की तस्वीर के लिए कई दिनों तक दुर्गम पहाड़ियों में ट्रैकिंग करनी पड़ी। उनकी सूची में शामिल अंतिम 15 प्रजातियों में से तीन हिमाचल में पहली बार दर्ज की गई हैं।

प्रकृति संरक्षण का भी दिया संदेश
डॉ. अभिनव चौधरी ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और अस्पताल प्रशासन को दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों, जंगलों के कटान और अवैध शिकार के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास तेजी से खत्म हो रहे हैं। उन्होंने जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

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