Solan: डेढ़ माह में पेपर के दाम 25 फीसदी तक बढ़े, गत्ता उद्योग पर संकट

Edited By Kuldeep, Updated: 28 Sep, 2026 08:17 PM

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प्रदेश के गत्ता उद्योग अब फिट संकट के दौर से गुजर रहा है। पेपर के दाम में एक माह के भीतर करीब 25 फीसदी तक की बढ़ौतरी से हिमाचल का गत्ता उद्योग संकट में आ गया है।

बीबीएन (ठाकुर): प्रदेश के गत्ता उद्योग अब फिट संकट के दौर से गुजर रहा है। पेपर के दाम में एक माह के भीतर करीब 25 फीसदी तक की बढ़ौतरी से हिमाचल का गत्ता उद्योग संकट में आ गया है। गत्ता उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि पेपर मिलों ने एक माह में अलग-अलग चरणों में एक से दो रुपए प्रति किलो की बढ़ौतरी करते हुए पेपर के दाम करीब 25 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। इसके मुकाबले उन्हें तैयार गत्ते के दाम नहीं मिल रहे हैं। इससे उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और उद्योग चलाना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। हिमाचल प्रदेश कारगोरेटिड बॉक्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष हेम राज चौधरी, मुकेश जैन ने कहा कि गत्ता उद्योग के उद्यमियों के अनुसार पेपर मिल मालिकों से कीमतों में बढ़ौतरी को लेकर बातचीत करने पर उन्हें बताया गया कि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण विदेशों से आने वाली पेपर कटिंग महंगी हो गई है। पेपर तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली यह कच्ची सामग्री महंगी मिलने के कारण पेपर मिलों ने कीमतों में बढ़ौतरी की है। उद्यमियों का कहना है कि इस बढ़ौतरी का सीधा असर गत्ता उद्योग की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।

बढ़ी लागत के अनुपात में नहीं मिल रहे गत्ते के दाम
उद्यमियों ने बताया कि पेपर गत्ता उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है। पेपर के दाम में लगातार बढ़ौतरी होने से उनकी लागत बढ़ गई है, लेकिन बाजार में गत्ते के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। ऐसे में तैयार माल बेचने पर उन्हें अपेक्षित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे माल की कीमतों में इसी तरह बढ़ौतरी होती रही और तैयार गत्ते के दाम नहीं बढ़े तो आने वाले समय में उद्योग चलाना मुश्किल हो जाएगा। हालात नहीं सुधरे तो कुछ इकाइयों को उत्पादन बंद करने तक का निर्णय लेना पड़ सकता है।

300 से अधिक इकाइयां, हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी
गत्ता उद्योग से जुड़े उद्यमियों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 300 से अधिक गत्ता उद्योग स्थापित हैं। इन इकाइयों में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की आजीविका इस उद्योग से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्थापित औद्योगिक इकाइयों में विभिन्न उत्पादों की पैकिंग के लिए गत्ते के बॉक्स का इस्तेमाल होता है। ऐसे में गत्ता उद्योग की लागत बढ़ने का असर अन्य उद्योगों की पैकेजिंग लागत पर भी पड़ सकता है। गत्ता उद्योग के उद्यमियों ने सरकार से मामले का संज्ञान लेने और पेपर के दाम में लगातार हो रही बढ़ौतरी पर निगरानी की मांग की।

प्रदेश में पचास हजार टन गत्ते की खपत
वरिष्ठ गत्ता उधमी मुकेश जयन ने बताया कि अकेले हिमाचल में पचास हजार गत्ता हर माह खपत होता है। लेकिन गत्ता उद्योग जिस प्रकार संकट के दौर से गुजर रहा है उससे साफ जाहिर है कि इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं। पेपर मिलों को पूछने वाला कोई नहीं। मनमर्जी करते हैं गत्ता मिलों को अगर बचाना है तो केंद्र और राज्य सरकार उचित कदम उठाए।इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष हेमराज चौधरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मुकेश जैन, आलोक कुमार उपाध्यक्ष विवियन, गत्ता उद्योग सुशील सिंगला, महेश और विकास सिंगला सहित अन्य उद्यमी मौजूद रहे।

 

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