Edited By Swati Sharma, Updated: 07 Jun, 2026 11:36 AM

Shimla News : भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई के महासचिव संजीव कटवाल ने हिमाचल प्रदेश बिजली पारेषण निगम लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के पूर्व मुख्य अभियंता विमल नेगी की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत के मामले में निष्पक्ष एवं व्यापक जांच किए जाने और...
Shimla News : भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई के महासचिव संजीव कटवाल ने हिमाचल प्रदेश बिजली पारेषण निगम लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के पूर्व मुख्य अभियंता विमल नेगी की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत के मामले में निष्पक्ष एवं व्यापक जांच किए जाने और दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की शनिवार को मांग की।
संजीव कटवाल ने मीडियाकर्मियों से कहा कि इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करने, आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर करने और तय नियमों का उल्लंघन करके निर्णय लिये जाने समेत जिन आरोपों का खुलासा किया है, वे प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता और ईमानदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। भाजपा नेता ने कांग्रेस नीत राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नेगी का मामला केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन से जुड़ा विषय है। नेगी 10 मार्च, 2025 को लापता हो गए थे। उनका शव 18 मार्च को बिलासपुर में रहस्यमय परिस्थितियों में मिला था। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया था कि उनके पति के वरिष्ठ अधिकारी उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे। इस मामले ने राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था और विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया था कि मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
कटवाल ने कहा, ''अगर किसी परियोजना की वास्तविक स्थिति और आधिकारिक रिकॉर्ड में अंतर होने के बावजूद प्रमाणपत्र जारी किए गए, अगर अधिकारियों पर कथित तौर पर दबाव डाला गया और अगर आपत्ति उठाने वालों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से दरकिनार कर दिया गया तो यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें पूरी पारदर्शिता जरूरी है।'' उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि ऐसी गतिविधियां किसके संरक्षण में जारी रहीं। कटवाल ने कहा, ''अगर जांच से यह संकेत मिलता है कि कुछ लोगों या संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई तो कांग्रेस सरकार को यह बताना चाहिए कि आरोपों की गंभीरता के बावजूद समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।'' उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी को दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया गया, अगर आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और अगर संस्थागत प्रक्रियाओं को कमजोर किया गया तो यह व्यवस्था संबंधी बड़ी विफलता को दर्शाता है और इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
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