Edited By Kuldeep, Updated: 20 Jul, 2026 04:27 PM

राज्य सरकार ने प्रदेश में भांग की खेती को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने इस संदर्भ में एक नई अधिसूचना जारी कर औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती, प्रसंस्करण और विनिर्माण को नियमों के तहत...
शिमला (संतोष): राज्य सरकार ने प्रदेश में भांग की खेती को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने इस संदर्भ में एक नई अधिसूचना जारी कर औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती, प्रसंस्करण और विनिर्माण को नियमों के तहत अनुमति दे दी है। इन नए नियमों को हिमाचल प्रदेश नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस (संशोधन) नियम, 2026 का नाम दिया गया है।
नई नियमावली के तहत भांग की खेती केवल औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान के लिए की जा सकेगी।
स्पष्ट रहे कि इसमें चरस और गांजा को बाहर रखा गया है। खुले में भांग की खेती करने पर सख्त पाबंदी होगी। खेती केवल बंद, बाड़ वाले और नियंत्रित वातावरण जैसे ग्रीनहाऊस या पॉलीहाऊस में ही की जा सकेगी। राज्य में भांग आधारित उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए कम से कम 100 करोड़ रुपए का न्यूनतम पूंजी निवेश अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा लाइसैंस के लिए 5 लाख रुपए की बैंक गारंटी भी देनी होगी। विनिर्माण इकाइयों के वार्षिक टर्नओवर पर 3 फीसदी का राज्य उपकर लगाया जाएगा। इसमें से 2 प्रतिशत दुग्ध उपकर पशुपालन विभाग को और 1 प्रतिशत पर्यावरण उपकर पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन विभाग को जाएगा।