Edited By Kuldeep, Updated: 18 Jul, 2026 10:04 PM

हिमाचल में ड्रेनेज सिस्टम से सड़कें सुरक्षित होंगी। लोक निर्माण विभाग ने राज्य में सड़कों को मानसून के दौरान होने वाले नुक्सान से बचाने के लिए ड्रेनेज-इम्प्रूवमैंट के तहत कार्यों की विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल में ड्रेनेज सिस्टम से सड़कें सुरक्षित होंगी। लोक निर्माण विभाग ने राज्य में सड़कों को मानसून के दौरान होने वाले नुक्सान से बचाने के लिए ड्रेनेज-इम्प्रूवमैंट के तहत कार्यों की विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सड़कों पर जल निकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित कर बार-बार होने वाले कटाव, सड़क धंसने, जलभराव, भूस्खलन और कलवर्ट चोक होने जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान करने के लिए ये दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार पहले चरण में केवल प्रमुख जिला सड़कों (एमडीआर) को शामिल किया जाएगा।
प्रत्येक प्रस्ताव 10 से 25 किलोमीटर की सतत सड़क पर आधारित होगा और सड़क का चयन जलभराव, भूस्खलन, बार-बार सड़क क्षति, कलवर्ट चोक होने तथा 2023 व 2025 में अधिक मुरम्मत खर्च वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर किया जाएगा। विभागीय मंडलों को पहले प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (पीपीआर) तैयार करनी होगी, जिसमें सड़क की स्थिति, ड्रेनेज संबंधी समस्याएं, फोटो और सुधार की आवश्यकता का उल्लेख रहेगा। तकनीकी समिति द्वारा चयन के बाद विस्तृत हाईड्रोलॉजिकल सर्वे कर डीपीआर तैयार की जाएगी। इन निर्देर्शों में साफ किया है कि इसके तहत केवल ड्रेनेज सुधार कार्य ही किए जाएंगे। सड़कों की सामान्य बिटुमिनस मुरम्मत या नवीनीकरण इसमें शामिल नहीं होगा।
आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रेनों को ढकना होगा अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत सड़कों पर सामान्यतः वी-शेप ड्रेन के स्थान पर यू-शेप ड्रेन बनाई जाएंगी। आबादी वाले क्षेत्रों में इन ड्रेनों को आरसीसी कवर से ढकना अनिवार्य होगा। बार-बार चोक होने वाले पाइप कलवर्ट की जगह प्री-फैब्रिकेटिड बॉक्स कलवर्ट लगाए जाएंगे। आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त क्रॉस ड्रेनेज संरचनाएं, पक्के शोल्डर, कैच-वॉटर ड्रेन, सब-सर्फेस ड्रेनेज और जल निकासी सुधार के अन्य वैज्ञानिक उपाय भी शामिल किए जाएंगे।