Edited By Kuldeep, Updated: 02 Jun, 2026 10:38 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने सतलुज नदी के मुहानों पर पड़े मलबे को लेकर कड़ा संज्ञान लिया है।
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने सतलुज नदी के मुहानों पर पड़े मलबे को लेकर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नर शिमला और डिप्टी कमिश्नर मंडी सहित खनन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में आने वाले सतलुज नदी के मुहानों का निरीक्षण कर एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करें। कोर्ट ने इन अधिकारियों को आदेश दिए कि वे एक व्यापक सर्वेक्षण करवाएं, ताकि उस रेत मलबे इत्यादि की मात्रा का आकलन किया जा सके, जिसका उपयोग प्रदेश में खनन के उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा करना अनुमति-योग्य है तथा अन्य नियमों और विनियमों का उल्लंघन नहीं करता है, तो इससे राज्य को ही लाभ होगा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कहा कि यह आम जानकारी की बात है कि सतलुज नदी के किनारों पर रेत के बड़े-बड़े टीले मौजूद हैं। मानसून के मौसम में पानी का बहाव तेज होने के कारण ये रेत के टीले पानी में डूब जाते हैं और गाद नदी के पानी में मिल जाती है। इससे जलाशय में गाद का जमाव बढ़ जाता है। जिस समय नदी में उफान नहीं होता, उस दौरान रेत के टीले नदी के दोनों किनारों पर दिखाई देते रहते हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को चाहिए कि इस रेत का सही उपयोग किया जा सके। जनहित याचिका में सतलुज नदी में, तत्तापानी स्थित कोल बांध जलाशय क्षेत्र से पहले जमा हुई अतिरिक्त गाद को हटाने और विभिन्न निवारक उपाय करने के संबंध में कई मुद्दे उठाए गए हैं। सरकारी प्राथमिक विद्यालय तत्तापानी के लिए एक अलग भवन के निर्माण और साथ ही एक पुल आदि के निर्माण की भी प्रार्थना की गई है।