Shimla: नशे के खिलाफ प्रहार, 8,250 से अधिक गिरफ्तार, 37 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

Edited By Kuldeep, Updated: 18 Oct, 2026 05:50 PM

shimla drugs action

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए नशे के नैटवर्क, उससे जुड़े लोगों और अवैध कमाई पर शिकंजा कसने की रणनीति अपनाई है।

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए नशे के नैटवर्क, उससे जुड़े लोगों और अवैध कमाई पर शिकंजा कसने की रणनीति अपनाई है। पिछले 3 वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत 5,642 मामले दर्ज किए गए और 8,250 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस अभियान में 139 सरकारी कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं, जिनमें राज्य सरकार के 15 कर्मचारी और पुलिस विभाग के 22 कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नशा तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरैंस की नीति पर काम कर रही है। अभियान का एक प्रमुख पहलू तस्करों की आर्थिक ताकत पर चोट करना है। वर्ष 2024 से 2026 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों और पुलिस जिलों में 115 मामलों में करीब 91.24 करोड़ रुपए की संपत्तियां फ्रीज की गई हैं।

इसके साथ ही नशे की आपूर्ति श्रृंखला, बार-बार अपराध में संलिप्त आरोपियों और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। साथ ही नशा तस्करी के मामलों में वित्तीय जांच को कार्रवाई का अहम हिस्सा बनाया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पुलिस जिला नूरपुर में 14 मामलों में 22.28 करोड़ रुपए की संपत्तियां फ्रीज की गईं। सोलन में 15 मामलों में 17.86 करोड़ और शिमला में 16 मामलों में 12.61 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई। ऊना में दो मामलों में 10.98 करोड़, सिरमौर में 7 मामलों में 8.84 करोड़ और कांगड़ा में 8 मामलों में 6.24 करोड़ की संपत्तियां फ्रीज की गईं।

मंडी, बद्दी, बिलासपुर, देहरा और कुल्लू में भी संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई हुई। वही वर्ष 2026 में 76 मामलों में 41.42 करोड़ रुपए की संपत्तियां फ्रीज की गईं, जबकि वर्ष 2024 में 12 मामलों में 25.43 करोड़ और वर्ष 2025 में 27 मामलों में 23.98 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा पीआईटी-एनडीपीएस कानून के तहत दिसम्बर 2025 तक 46 बड़े नशा तस्करों को निरुद्ध करने और लगभग 46 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं।

नशा तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए मार्च 2025 में विधानसभा ने 2 विधेयक पारित किए। इनमें हिमाचल प्रदेश ड्रग्स एंड कंट्रोल्ड सब्सटेंसेज विधेयक, 2025 तथा हिमाचल प्रदेश ऑर्गेनाइज्ड क्राइम्स (प्रिवैंशन एंड कंट्रोल) विधेयक, 2025 शामिल हैं। इनका उद्देश्य मादक पदार्थों की रोकथाम, अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और संगठित आपराधिक नैटवर्क पर अंकुश लगाने की व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

पंचायत स्तर पर भी निगरानी
पुलिस और प्रवर्तन एजैंसियां नशे की सप्लाई चेन तथा संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर नजर रखने के साथ पंचायत स्तर पर भी निगरानी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। सरकार की मंशा नशे के कारोबार को केवल एक आपराधिक मामले के रूप में देखने के बजाय उससे जुड़े पूरे नैटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करने की है।

सूचना देने वालों के लिए 10 लाख तक पुरस्कार
नशा तस्करी के खिलाफ आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक दिसम्बर 2025 को धर्मशाला में चिट्टा विरोधी जागरूकता वॉकथॉन के दौरान चिट्टा सूचना पुरस्कार योजना शुरू की थी। इसके तहत सूचना देने वालों को 10 हजार से 10 लाख रुपए तक नकद पुरस्कार देने का प्रावधान है। नागरिक आपातकालीन हैल्पलाइन 112 के माध्यम से सूचना दे सकते हैं। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने पर भी जोर दिया गया है।

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