Edited By Kuldeep, Updated: 03 Aug, 2026 09:54 PM

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष, 2026-27 के लिए राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत प्रदेश को 403.92 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी कर दी है।
शिमला (कुलदीप): केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष, 2026-27 के लिए राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत प्रदेश को 403.92 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी कर दी है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की तरफ से इसकी अनुमति के बाद केंद्र ने राज्य सरकार को यह धनराशि तत्काल जारी करने के कड़े निर्देश दिए हैं। वित्तीय वर्ष, 2026-27 के दौरान इस योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए कुल 3,049.20 करोड़ रुपए की 50 वर्षीय ब्याजमुक्त ऋण सहायता स्वीकृत की गई है, जिसकी यह पहली किस्त है।
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है, अगर योजना के फंड का उपयोग किसी अन्य कार्य में किया जाता है अथवा दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो भविष्य में राज्य को मिलने वाले केंद्रीय करों के हिस्से से संबंधित राशि में कटौती की जाएगी। केंद्र सरकार की इस सौगात से राज्य में लंबे समय से लंबित पड़ी सड़कों, पुलों, जल शक्ति और अन्य आधारभूत ढांचागत परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार ने विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के लिए फंडिंग को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। राज्य को यह फंड सिंगल नोडल एजैंसी (एसएनए) खाते के माध्यम से 10 कार्य दिवसों के भीतर और हर हाल में अधिकतम 30 दिनों के अंदर संबंधित कार्यान्वयन एजैंसियों तक त्वरित हस्तांतरण करना होगा। ऐसे में यदि 30 दिनों के भीतर धनराशि एजैंसियों तक नहीं पहुंची, तो राज्य सरकार को इस विलंब अवधि का ब्याज केंद्र सरकार को चुकाना पड़ेगा।
साथ ही एसएनए खाते पर मिलने वाला ब्याज भी केंद्र को वापस जमा करवाना होगा। वित्त मंत्रालय ने नो फंड पार्किंग को लेकर स्पष्ट किया है कि अंतिम लाभार्थी तक भुगतान पहुंचे बिना किसी भी एजैंसी की तरफ से खातों में राशि रोककर रखने (फंड पार्किंग) को खर्च नहीं माना जाएगा। इस तरह जारी की गई पूरी धनराशि का उपयोग 31 मार्च, 2027 से पहले करना अनिवार्य होगा।
नियमों की अनदेखी पड़ेगी भारी
विकास परियोजनाओं में मनमाने बदलाव रोकने के लिए केंद्र ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जिन परियोजनाओं के लिए यह फंड स्वीकृत हुआ है, केंद्र की पूर्व अनुमति के बिना उनमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यदि इसमें उल्लंघन किया गया तो वित्तीय सहायता रोकी जाएगी।