Edited By Vijay, Updated: 03 Jun, 2026 01:16 PM

साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे आम जनता ही नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को करीब से जानने वाले बैंक अधिकारियों को भी अपना शिकार बना रहे हैं।
शिमला (राक्टा): साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे आम जनता ही नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को करीब से जानने वाले बैंक अधिकारियों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पंजाब नैशनल बैंक के एक डिप्टी मैनेजर के खाते से 10 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की एंटी करप्शन ब्रांच शिमला ने अज्ञात हैकर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक यह घटना कांगड़ा जिले की पीएनबी राजनगर शाखा में तैनात डिप्टी मैनेजर देव राज शर्मा के साथ घटी है। उन्होंने शिकायत दर्ज करवाई है कि 2 दिसम्बर, 2024 को उनके बैंक खाते से बिना उनकी जानकारी के 5-5 लाख रुपए के 2 ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हुए। आरोप है कि अज्ञात साइबर ठगों ने किसी तरह उनके बैंकिंग क्रेडेंशियल (लॉगिन डिटेल्स) हासिल कर लिए और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) प्रमाणीकरण प्रणाली में सेंध लगाकर इस बड़ी ठगी को अंजाम दिया।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगी गई 10 लाख की रकम दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। एक खाता एक्सिस बैंक का था और दूसरा पीएनबी का। शिकायत के तुरंत बाद एक्शन लेते हुए संबंधित पीएनबी खाते को फ्रीज कर दिया गया। गनीमत यह रही कि उस खाते में 2,70,488 रुपए मौजूद मिले, जिन्हें सुरक्षित कर लिया गया है। हालांकि, शेष रकम ठगों ने पहले ही अन्य अज्ञात खातों में ट्रांसफर कर दी थी।
डिप्टी मैनेजर देव राज शर्मा ने शुरुआत में इस धोखाधड़ी की रिपोर्ट चढियार पुलिस चौकी में दर्ज करवाई थी। बाद में इस हाई-टैक क्राइम को साइबर सैल पालमपुर के हवाले कर दिया गया, लेकिन अब इस मामले को गहरी आपराधिक साजिश और साइबर धोखाधड़ी मानते हुए इसकी कमान सीबीआई के हाथों में सौंप दी गई है।
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा शिमला ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। जांच एजैंसी ने इंस्पैक्टर रविंदर कुमार को इस जटिल केस की जिम्मेदारी सौंपी है। अब सीबीआई की टीम ठगों की गर्दन तक पहुंचने के लिए डिजिटल ट्रेल, ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और जिन खातों में पैसा गया उनकी गहन तकनीकी जांच कर रही है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी नई और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है।
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