Kangra News: बिना डिग्री और ड्रग लाइसैंस के चला रहा था क्लीनिक, कोर्ट ने सुनाई कैद और जुर्माने की सजा

Edited By Vijay, Updated: 23 Jul, 2026 09:00 PM

punishment on running clinic without degree and drug license

बिना वैध एलोपैथिक चिकित्सा डिग्री और ड्रग लाइसैंस के दवाओं का कारोबार करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरू भागीरथ ठाकुर की अदालत ने अवैध रूप से एलोपैथिक दवाओं का भंडारण और बिक्री करने के आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष...

पालमपुर (भृगु): बिना वैध एलोपैथिक चिकित्सा डिग्री और ड्रग लाइसैंस के दवाओं का कारोबार करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरू भागीरथ ठाकुर की अदालत ने अवैध रूप से एलोपैथिक दवाओं का भंडारण और बिक्री करने के आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कारावास और कुल 1.25 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला राज्य सरकार की ओर से ड्रग इंस्पैक्टर पालमपुर द्वारा दायर शिकायत पर आधारित था। 

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि धर्मण पालमपुर निवासी उरिंदर सिंह अपने आवास के भूतल पर बिना किसी वैध ड्रग लाइसैंस और मान्यता प्राप्त एलोपैथिक चिकित्सा डिग्री के क्लीनिक चला रहा था तथा एलोपैथिक दवाओं का भंडारण एवं बिक्री कर रहा था। सीएमओ कार्यालय धर्मशाला से मिली शिकायत के आधार पर 29 फरवरी, 2016 को ड्रग इंस्पैक्टर ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ आरोपी के परिसर का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान वहां से भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। निरीक्षण के दौरान आरोपी वैध ड्रग लाइसैंस या एलोपैथिक चिकित्सा की मान्यता प्राप्त डिग्री प्रस्तुत नहीं कर सका। उसके द्वारा पेश किए गए प्रमाणपत्र भी दवाओं के भंडारण और बिक्री के लिए मान्य नहीं पाए गए। इसके बाद बरामद दवाओं को जब्त कर उनके नमूने सरकारी विश्लेषक, केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला कंडाघाट भेजे गए। 

जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद मामला अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी ने ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 18(ए) और 18(सी) का उल्लंघन किया है। अदालत ने आरोपी को धारा 28 सहपठित धारा 18(ए) के तहत नौ माह के साधारण कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, धारा 27(बी)(ii) सहपठित धारा 18(सी) के तहत तीन वर्ष के कारावास और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, साथ ही आरोपी को नियमानुसार अपील करने का अधिकार भी दिया गया है। मामले की पैरवी पब्लिक प्रॉसीक्यूटर मोहिंद्र कुमार ने की।

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