हिमाचल में मानसून तबाही मामले में NGT सख्त, सुनवाई में शामिल नहीं होने पर अधिकारियों को लगाई फटकार

Edited By Swati Sharma, Updated: 16 Oct, 2026 05:56 PM

ngt takes strict stance on matters related to devastation caused during monsoon

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि राज्य में मानसून के दौरान हुई तबाही से जुड़े मामले में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव अगली सुनवाई में वर्चुअल रूप से शामिल हों और...

Shimla News : राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि राज्य में मानसून के दौरान हुई तबाही से जुड़े मामले में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव अगली सुनवाई में वर्चुअल रूप से शामिल हों और अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्हें ही मुख्य सचिव को स्वयं वर्चुअल रूप से पेश होना पड़ेगा।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की प्रधान पीठ ने 13 अक्टूबर को एक मूल आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। यह आवेदन 25 नवंबर, 2023 को छपी एक खबर से जुड़ी हुई है। खबर का शीर्षक था, 'हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही के पीछे वनों की कटाई, खराब निर्माण कार्य और अवैज्ञानिक एवं अवैध खनन जिम्मेदार हैं।' इस खबर में पहाड़ी राज्य में हुई तबाही के लिए इन्हीं कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। पीठ ने कहा कि उस दिन प्रधान सचिव वर्चुअल रूप से उपस्थित नहीं थे और न ही उनकी ओर से पेश होने में कठिनाई बताने वाली कोई अर्जी दाखिल की गयी थी। पीठ ने कहा कि इससे एनजीटी के आदेश का स्पष्ट रूप से उल्लंघन हुआ है। पीठ ने याद दिलाया कि चार अगस्त, 2026 को हुई पिछली सुनवाई के दौरान, प्रतिवादी संख्या एक (मुख्य सचिव), प्रतिवादी संख्या तीन (प्रधान सचिव, नगर एवं ग्राम नियोजन) और प्रतिवादी संख्या चार (अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, वन/पर्यावरण) समेत अन्य की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ , जिससे उस दिन प्रभावी कार्यवाही नहीं हो सकी।

पीठ ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण उस तारीख को सुनवाई रुक गई थी और उसने मुख्य सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश देने की बजाय 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव को वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने का आदेश दिया था। पीठ एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की सुनवाई कर रहा है। इस मामले में प्रतिवादियों में राज्य सरकार के मुख्य सचिव, तथा नगर एवं ग्राम नियोजन और वन/पर्यावरण विभागों के प्रमुख शामिल हैं। प्रतिवादी एक से पांच की ओर से अधिवक्ता दिव्यांशु कुमार श्रीवास्तव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए जबकि हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता आदित्य विजयकुमार ने किया और वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। एनजीटी ने निर्देश दिया कि आदेश की एक प्रति आवश्यक अनुपालन के लिए मुख्य सचिव को भेजी जाये। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 22 जनवरी, 2027 को सूचीबद्ध किया गया है। 

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