Edited By Kuldeep, Updated: 05 Sep, 2026 05:30 PM

नेपाल में ग्लेशियर झील से जुड़ी त्रासदी को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी प्रदेश में मौजूद छोटी-बड़ी ग्लेशियर झीलों को लेकर सुरक्षा का खाका तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है।
शिमला (भूपिन्द्र): नेपाल में ग्लेशियर झील से जुड़ी त्रासदी को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी प्रदेश में मौजूद छोटी-बड़ी ग्लेशियर झीलों को लेकर सुरक्षा का खाका तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियर झीलों से भविष्य में संभावित खतरे को देखते हुए सरकार अब इनकी स्थिति, संवेदनशीलता और जोखिम का आकलन करेगी। इसके लिए जल्द ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में प्रदेश में मौजूद ग्लेशियर झीलों को लेकर विस्तृत योजना तैयार की जाएगी। इसमें सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि प्रदेश में कितनी ग्लेशियर झीलें हैं और इनमें से कितनी झीलें संभावित रूप से वल्नरेबल यानी संवेदनशील हैं। झीलों की संवेदनशीलता के आधार पर इनके लिए अलग-अलग स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने पर चर्चा होगी।
सरकार यह भी तय करेगी कि किन ग्लेशियर झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की आवश्यकता है और किन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से लगातार निगरानी की जा सकती है। इसके लिए सैटेलाइट आधारित मॉनीटरिंग को भी विकल्प के तौर पर देखा जाएगा। सरकार का प्रयास रहेगा कि किसी भी ग्लेशियर झील में अचानक बदलाव, जलस्तर बढ़ने या संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते इसकी सूचना संबंधित एजैंसियों और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सके। नेपाल त्रासदी ने हिमालयी राज्यों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है।
4 ग्लेशियर झीलों के लिए 5 करोड़ का प्रोजैक्ट तैयार, केंद्र से मंजूरी और फंडिंग के लिए जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव : जगत सिंह नेगी
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार छोटी-बड़ी ग्लेश्यिर झीलों के लिए एक खाका तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा सरकार ने प्रदेश की चार ग्लेशियर झीलों को लेकर करीब 5 करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट भी तैयार किया है। इस प्रोजैक्ट को जल्द ही केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजने की तैयारी है। केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद इसके लिए फंडिंग उपलब्ध होने की उम्मीद है। इस परियोजना के जरिए चिन्हित ग्लेशियर झीलों की निगरानी और संभावित खतरे को कम करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर रहेगा।