Himachal: किन्नौर में बरपा कुदरत का कहर, आसमानी बिजली गिरने से 200 से अधिक बेजुबानों की गई जान

Edited By Vijay, Updated: 13 Aug, 2026 04:24 PM

nature s havoc in kinnaur

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां रूपी कंडे क्षेत्र के दुर्गम इलाके में बुधवार देर रात आसमानी बिजली गिरने से 200 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई।

रिकांगपिओ (राजकुमार): हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां रूपी कंडे क्षेत्र के दुर्गम इलाके में बुधवार देर रात आसमानी बिजली गिरने से 200 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई। इस भयानक प्राकृतिक आपदा में पशुपालकों का लाखों रुपए का नुक्सान हुआ है। हालांकि, गनीमत यह रही कि इस घटना में इंसान सुरक्षित बच गए।

रात 11 बजे बरपा कुदरत का कहर, शैड में होने से बचे पशुपालक
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह खौफनाक हादसा बुधवार रात करीब 11 बजे पेश आया। उस समय रूपी कंडे के चरागाहों में भेड़-बकरियों का झुंड बैठा हुआ था। अचानक तेज गड़गड़ाहट के साथ आसमान से मौत बनकर बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आकर 200 से ज्यादा बेजुबानों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय पशुपालक अपने झुंड से कुछ दूरी पर बने एक शैड के अंदर सो रहे थे, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई।

अंधेरे में 150 शव ही गिन पाया गुमान सिंह
रूपी कंडे एक बेहद दुर्गम इलाका है, जहां मोबाइल नैटवर्क की भारी समस्या रहती है। हादसे के बाद खौफजदा पशुपालक गुमान सिंह को अपने परिजनों तक यह मनहूस खबर पहुंचाने के लिए कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर मोबाइल नैटवर्क तलाशना पड़ा। रूपी पंचायत के प्रधान मगला खोजान ने बताया कि घटना के वक्त घने अंधेरे के कारण पशुपालक गुमान सिंह केवल 150 मृत भेड़-बकरियों तक ही गिनती कर पाया था। हालांकि, दिन के उजाले में यह आंकड़ा 200 के पार होने का अंदेशा जताया जा रहा है। पंचायत प्रधान ने तुरंत इस आपदा की सूचना प्रशासन को दे दी थी।

प्रशासन की टीम मौके के लिए रवाना : एसडीएस
इस भारी नुक्सान की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है। भावानगर की एसडीएम नेहा नेगी ने बताया कि वीरवार सुबह ही प्रशासन की एक संयुक्त टीम को नुकसान का जायजा लेने के लिए घटनास्थल की ओर रवाना कर दिया गया है। एसडीएम ने बताया कि घटनास्थल वाले इलाके में मोबाइल नैटवर्क की सुविधा नहीं है, जिस कारण फिलहाल वहां गई हुई टीम से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। टीम के वापस लौटने के बाद ही मृत भेड़-बकरियों का सही और अंतिम आंकड़ा स्पष्ट हो पाएगा, जिसके आधार पर प्रभावित पशुपालकों को नियमानुसार मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!