Kullu: 17 वर्ष बाद देव आस्था का अद्भुत विधान, काहिका में मृत नड़ का हुआ पुनर्जन्म! साक्षी बने हजारों लोग

Edited By Vijay, Updated: 19 Aug, 2026 07:08 PM

kahika utsav

कुल्लू जिला की ऊझी घाटी के रूमसू गांव में 17 वर्ष बाद आयोजित ऐतिहासिक काहिका उत्सव का बुधवार को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ समापन हुआ। काहिका के अंतिम दिन रूमसू में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

नग्गर: कुल्लू जिला की ऊझी घाटी के रूमसू गांव में 17 वर्ष बाद आयोजित ऐतिहासिक काहिका उत्सव का बुधवार को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ समापन हुआ। काहिका के अंतिम दिन रूमसू में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शाम के समय काहिका का सबसे रहस्यमयी विधान नड़ बदाह देव रीति के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान देव रूमसू गांव शक्ति और आस्था के अद्भुत संगम का साक्षी बना। जब नड़ नंत राम पुनः जीवित हो गया। 17, 18 और 19 अगस्त तक चले इस धार्मिक आयोजन ने पूरी ऊझी घाटी को देवमय बना दिया। देवता शुभ नारायण के आदेश पर आयोजित काहिका को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। दूर-दूर से लोग रूमसू पहुंचे और इस प्राचीन देव परंपरा के साक्षी बने।

माता त्रिपुरा सुंदरी की उपस्थिति ने बढ़ाई काहिका की धार्मिक गरिमा
रूमसू काहिका में नग्गर की अधिष्ठात्री माता त्रिपुरा सुंदरी की भूमिका विशेष रही। देव परंपरा के अनुसार माता त्रिपुरा सुंदरी अपने रथ सहित 3 दिनों तक रूमसू में विराजमान रहीं। माता त्रिपुरा सुंदरी के कारदार जोगिंदर आचार्य ने बताया कि रूमसू काहिका में माता की उपस्थिति का विशेष महत्व है। माता की उपस्थिति के बिना यह देव आयोजन पूर्ण नहीं माना जाता। उन्होंने बताया कि सोमवार को नग्गर के मशाड़ा गांव स्थित माता कैलाशनी मंदिर से माता त्रिपुरा सुंदरी काहिका के लिए रूमसू रवाना हुई थीं।

17 साल बाद देव आदेश पर हुआ आयोजन
देवता शुभ नारायण के कारदार परमिंदर सिंह ने बताया कि देवता के आदेश पर 17 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद रूमसू में काहिका का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि काहिका हिमाचल की प्राचीन देव संस्कृति और देव परंपराओं से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। इस आयोजन के दर्शन और देव आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हजारों श्रद्धालु रूमसू पहुंचे।

नड़ बदाह बना आस्था का प्रमुख केंद्र
काहिका के अंतिम दिन नड़ बदाह देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग रूमसू में एकत्रित हुए। देव रीति और विधि-विधान के बीच नड़ नंत राम के मृत होकर पुनः जीवित होने का विधान संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा रूमसू देव जयघोष और आस्था से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत देव विधान को देव शक्ति व सदियों पुरानी परंपरा के रूप में देखा।

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