Edited By Swati Sharma, Updated: 26 Jun, 2026 03:46 PM

Shimla News : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को सरकारी आवासीय आवास आवंटित करने की मौजूदा प्रक्रिया पर गहरी नाराजगी जताई और इस प्रणाली को "अपारदर्शी" और "लॉटरी" जैसा बताया। कोर्ट ने पहले राज्य सरकार से सवाल किया था कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग...
Shimla News : हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को सरकारी आवासीय आवास आवंटित करने की मौजूदा प्रक्रिया पर गहरी नाराजगी जताई और इस प्रणाली को "अपारदर्शी" और "लॉटरी" जैसा बताया। कोर्ट ने पहले राज्य सरकार से सवाल किया था कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के कर्मचारियों को आवास आवंटन के लिए बार-बार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के पास जाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ता है?
जीएडी विभाग के पास मौजूद इस एकाधिकार और घर व सरकारी आवास आवंटन की अपारदर्शी प्रणाली के कारण ही ऐसी स्थिति पैदा हुई है कि किसी अधिकारी या अधिकारियों को सरकारी घर का आवंटन लॉटरी से कम नहीं माना जाता है।" ये टिप्पणियां जस्टिस अजय मोहन गोयल ने अमित कुमार ठाकुर द्वारा टाइप-III सरकारी आवास के आवंटन के संबंध में हिमाचल प्रदेश राज्य और एक अन्य प्रतिवादी के खिलाफ दायर सिविल रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) के पास सरकारी आवासों का कोई अलग पूल नहीं है। सरकार के अनुसार, आयोग के कर्मचारियों को अन्य पात्र सरकारी कर्मचारियों के साथ 'हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास (सामान्य पूल) आवंटन नियम, 1994' के तहत आवास के लिए विचार किया जाता है। सरकार ने आगे कहा कि उपलब्ध सरकारी आवासों की संख्या पात्र आवेदकों की संख्या से काफी कम है और आवंटन 'हाउस अलॉटमेंट कमेटी' द्वारा निर्धारित नियमों और मानदंडों के अनुसार किया जाता है। इसने यह भी कहा कि सरकारी आवास के आवंटन का दावा अधिकार के तौर पर नहीं किया जा सकता है।
हाई कोर्ट ने जवाब को असंतोषजनक पाया
हालांकि, हाई कोर्ट ने जवाब को असंतोषजनक पाया और कहा कि इसमें आवंटन प्रक्रिया से जुड़ी बड़ी चिंताओं का ठीक से समाधान नहीं किया गया है।न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा, "कम से कम यह तो कहा ही जा सकता है कि निर्देशों में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है जो कोर्ट को पहले से पता न हो।" उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणियों में सुझाव दिया कि सरकारी आवास के लिए कर्मचारियों से हर साल नए आवेदन मांगने की मौजूदा प्रक्रिया को बंद कर दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, कोर्ट ने आवेदकों की एक ही स्थायी वेटिंग लिस्ट बनाए रखने का प्रस्ताव दिया, जिसमें सीनियरिटी (वरिष्ठता) का निर्धारण आवेदन की तारीख के आधार पर किया जाए। जिन कर्मचारियों को आवास आवंटित हो जाए, उन्हें लिस्ट से हटाया जा सकता है, जबकि नए आवेदकों को उनके आवेदन के क्रम के अनुसार लिस्ट में जोड़ा जा सकता है।
20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने HPPSC जैसे स्वतंत्र संस्थानों के लिए कम से कम कुछ सरकारी आवास आरक्षित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था से ये संस्थान काम की जरूरतों और तात्कालिकता के आधार पर आवास आवंटित कर सकेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई, 2026 को होगी। सुनवाई के दौरान, एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि बेंच द्वारा उठाए गए मुद्दों को विचार के लिए सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।
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