हिमाचल BJP ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कामकाज पर जताई चिंता,  उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की

Edited By Swati Sharma, Updated: 07 Jul, 2026 02:57 PM

himachal bjp expressed concern over the functioning of hpspcb

Shimla News : भाजपा की हिमाचल प्रदेश की इकाई के प्रवक्ता और विधायक राकेश जामवाल ने सोमवार को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) के कामकाज पर चिंता जताई और इसमें कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय व स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। भारतीय जनता...

Shimla News : भाजपा की हिमाचल प्रदेश की इकाई के प्रवक्ता और विधायक राकेश जामवाल ने सोमवार को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) के कामकाज पर चिंता जताई और इसमें कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय व स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने राज्य सरकार से यह भी मांग की कि नियमों का उल्लंघन करने या भ्रष्ट आचरण में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जामवाल ने यहां जारी एक प्रेस बयान में कहा कि जिस तरह से प्रशासनिक फैसले, नियुक्तियां और वैधानिक मंजूरियां दी जा रही हैं, उससे कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एचपीएसपीसीबी के भीतर मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था अपीलीय तंत्र (अपील प्रक्रिया) की स्वतंत्रता से समझौता करती दिख रही है। सदस्य सचिव, जिनके फैसलों के खिलाफ अपील की जाती है, उन्हें एक ऐसे पद पर बैठा दिया गया है जो अपील प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया, "ऐसी व्यवस्था प्राकृतिक न्याय और संस्थागत जवाबदेही के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।" जामवाल ने आरोप लगाया कि सहमति मंजूरी (कंसेंट अप्रूवल) जारी करने और आधिकारिक पत्राचार सहित मुख्य कार्यों को कथित तौर पर एक विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) द्वारा संभाला जा रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या उचित प्रक्रिया और वैधानिक मानदंडों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर मुट्ठी भर लोग महत्वपूर्ण फैसलों पर असमान रूप से नियंत्रण कर रहे हैं, तो इसकी गहन जांच होनी चाहिए।"

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बोर्ड गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं का केंद्र बन गया है और भ्रष्टाचार की इन रिपोर्टों की व्यापक जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि नियुक्तियों, सहमति मंजूरियों, फाइलों की आवाजाही और अपीलीय तंत्र के कामकाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। 

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