Edited By Swati Sharma, Updated: 19 Sep, 2026 02:16 PM

ग्राम पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि अब पंचायतें अपनी इच्छा के मुताबिक किसी भी काम पर खर्च नहीं कर सकेंगी। केंद्र सरकार ने इस राशि के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट दायरा तय किया है। पंचायतों को केंद्र द्वारा अधिसूचित 29 कार्यों...
Solan News : ग्राम पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि अब पंचायतें अपनी इच्छा के मुताबिक किसी भी काम पर खर्च नहीं कर सकेंगी। केंद्र सरकार ने इस राशि के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट दायरा तय किया है। पंचायतों को केंद्र द्वारा अधिसूचित 29 कार्यों के तहत ही बजट खार्च करना होगा। यानी पंचायतों के पास राशि तो होगी, लेकिन उसके इस्तेमाल की सीमा पहले से निर्धारित रहेगी।
16वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक कुल 3744 करोड़ रुपए के अनुदान की अनुशंसा की गई है।इसमें 2996 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट के रूप में शामिल हैं। बेसिक ग्रांट में 1498 करोड़ रुपए टाइड और 1498 करोड़ रुपए अनटाइड अनुदान के रूप में शामिल हैं। अनुदान राशि के खर्च का आधार संविधान के अनुच्छेद 243जी के तहत 11वीं अनुसूची में शामिल पंचायतों से संबंधित विषयों को बनाया गया है। इसमें कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई, जल प्रबंधन, पशुपालन, मत्स्य पालन, सामाजिक वानिकी, लघु एवं कुटीर उद्योग, ग्रामीण आवास, पेयजल, सड़कें, ग्रामीण विद्युतीकरण और गैर-पारंपरिक ऊर्जा जैसे कार्य शामिल हैं।
एससीएसटी सहित कमजोर वगों का कल्याण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सामुदायिक परिसंपत्तियों के रख-रखाव को भी 29 कार्यों में शामिल किया गया है। इस व्यवस्था का सीधा अर्थ है कि पंचायतों को मिलने वाली वित्त आयोग की राशि का उपयोग तय विकास कार्यों के लिए ही करना होगा। पंचायत स्तर पर विकास की प्राथमिकताएं तय करने की गुंजाइश रहेगी, लेकिन खार्च 11वीं अनुसूची में निर्धारित विषयों के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकेगा। जिला पंचायत अधिकारी राणा ने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायत द्वारा किए जाने वाले कार्यों का अनुच्छेद 243 जी की 11वीं अनुसूची में उल्लेख किया गया है। यह 29 कार्य हैं, जो इस वित्त आयोग के तहत किए जाएंगे।
प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें