सोलन अस्पताल की क्रसना लैब का कारनामा, पोते के टेस्ट में आया दादा का नाम! रिपोर्ट की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल

Edited By Swati Sharma, Updated: 11 Sep, 2026 01:23 PM

the dubious feat of the krsnaa lab at solan hospital

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की क्रसना लैब का गजब का कारनामा सामने आया है। लैब में पोते ने टैस्ट करवाया और रिपोर्ट दादा के नाम की आई। इसे देखकर मरीज भी हैरान हो गया। उनके नाम के स्थान पर दादा का नाम था। लिपिकीय त्रुटि मानकर वह डॉक्टर के पास उस रिपोर्ट को...

Solan News : क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की क्रसना लैब का गजब का कारनामा सामने आया है। लैब में पोते ने टैस्ट करवाया और रिपोर्ट दादा के नाम की आई। इसे देखकर मरीज भी हैरान हो गया। उनके नाम के स्थान पर दादा का नाम था। लिपिकीय त्रुटि मानकर वह डॉक्टर के पास उस रिपोर्ट को दिखाने पहुंच गया लेकिन रिपोर्ट के परिणाम पर डॉक्टर को ही संदेह हो गया।

रिपोर्ट में किएटिनिन 1.34 मिलीग्राम प्रति डैसीलीटर, जो नॉर्मल रेंज से अधिक था। इस पर मरीज ने बुधवार को ही क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के साथ ही एक निजी लैब से अपने यही टैस्ट करवाए। दोनों लैब की रिपोर्ट में बड़ा अंतर पाया। निजी लैब में किएटिनिन 0.82 मिलीग्राम प्रति डैसीलीटर था। इससे स्पष्ट है कि नाम के साथ टैस्ट की गुणवत्ता भी कटघरे में खड़ी हो गई है। अगर चिकित्सक को पहली रिपोर्ट पर संदेह नहीं होता और उसी के आधार पर उपचार शुरू कर दिया जाता तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि इस मामले को महज चूक से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन यह किसी के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। शिकायत मिलने पर अस्पताल प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है। मामला 9 सितम्बर का है। हालांकि शिकायत गुरूवार को की गई है।

वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक ने की पुष्टि

बताया जा रहा है कि सोलन के 32 वर्षीय दीपक शर्मा अपना इलाज करवाने के लिए क्षेत्रीय अस्पताल सोलन पहुंचे थे। डॉक्टर ने जांच करने के बाद आरएफटी टैस्ट करवाने की सलाह दी। वह टैस्ट करवाने क्रसना लैब पहुंचा व खून का सैंपल दिया। कुछ समय बाद मिली रिपोर्ट में उनके नाम के स्थान पर उनके दादा का नाम था। इसे देखकर वह हैरान हो गया। उन्होंने लैब के कर्मचारियों से पूछताछ की तो वे भी स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ थे। फिर बताया गया कि सैंपल के समय जो मोबाइल फोन नंबर दिया गया, उस पर नंबर से कुछ समय पहले दादा के नाम की एंट्री हुई है। इस कारण सिस्टम ने यह नाम उठा लिया। क्या संबंधित कर्मचारी को नाम चैक नहीं करना चाहिए था। दीपक के दादा के पास अपना मोबाइल फोन नहीं था, इस कारण उन्होंने अपना फोन नंबर दिया था। हालांकि उस समय यह मामला शांत हो गया लेकिन जब रिपोर्ट के परिणाम पर डॉक्टर को संदेह हुआ और दूसरी लैब की रिपोर्ट में परिणाम कुछ और आए तो मरीज के पैरों तले जमीन खिसक गई। यही कारण है कि दीपक शर्मा ने अस्पताल एमएस को लिखित शिकायत दी तथा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। क्षेत्रीय अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश पंवार ने पुष्टि करते हुए कहा कि उनके पास यह शिकायत आई है। इसे लेकर क्रसना लैब से जवाब मांगा गया है।

जानें पीड़ित ने क्या कहा?

पीड़ित दीपक शर्मा ने बताया कि पहले तो उनके नाम के स्थान पर दादा का नाम रिपोर्ट में एंटर किया गया। हालांकि यह कथित लापरवाही का मामला है। नाम सही एंटर होना चाहिए था। जब रिपोर्ट आई तो इसकी गुणवत्ता पर संबंधित डॉक्टर को भी संदेह हुआ। निजी लैब में टैस्ट करवाए तो क्रिएटिनिन नॉर्मल आया। क्रसना की रिपोर्ट से तो वह टेंशन में आ गए। अब इससे मानवीय भूल मानकर मामले को रफा-दफा नहीं किया जा सकता। वह कितने परेशान हुए, इसे अस्पताल प्रशासन भी समझ नहीं रहा है।

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