Edited By Swati Sharma, Updated: 25 Jun, 2026 10:32 AM

हिमाचल डेस्क : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लंबे समय से चल रही चर्चाओं और अटकलों को खत्म करते हुए हिमाचल प्रदेश के दो जिलों में नये जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। पार्टी ने निगम भंडारी को किन्नौर और हरि कृष्ण हिमरल को शिमला...
हिमाचल डेस्क : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लंबे समय से चल रही चर्चाओं और अटकलों को खत्म करते हुए हिमाचल प्रदेश के दो जिलों में नये जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। पार्टी ने निगम भंडारी को किन्नौर और हरि कृष्ण हिमरल को शिमला ग्रामीण का जिला कांग्रेस समिति (डीसीसी) का अध्यक्ष बनाया है। इन नियुक्तियों के साथ ही पिछले लगभग छह महीनों से चली आ रही प्रक्रिया पूरी हो गयी है।
दरअसल, गत जनवरी में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने राज्य के 11 जिलों के अध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी थी, लेकिन किन्नौर और शिमला ग्रामीण के नामों को आगे की चर्चा के लिए रोक कर रखा गया था। किन्नौर निवासी भंडारी कांग्रेस के एक युवा और उभरते हुए नेता हैं। उन्होंने युवा कांग्रेस के जरिए अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। वह हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष और बाद में भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे हैं। ज़मीनी कार्यकर्ताओं और युवाओं के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले भंडारी आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर काफी सक्रिय रहे हैं। उनकी इस नयी जिम्मेदारी को आदिवासी इलाकों में पार्टी को मजबूत करने और नये नेताओं को आगे बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
हिमरल कांग्रेस संगठन का एक अनुभवी चेहरा
वहीं, हिमरल को हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संगठन का एक अनुभवी चेहरा माना जाता है। वह पार्टी में सचिव और प्रशिक्षण विभाग के प्रमुख जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। हाल के चुनावों के दौरान कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन केंद्र में उनकी भूमिका अहम थी। हाल ही में उन्हें हिमाचल प्रदेश कांग्रेस समिति का महासचिव भी बनाया गया था। राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले शिमला ग्रामीण जिले की कमान मिलना उनके लंबे अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का इनाम माना जा रहा है। इन दोनों नियुक्तियों के साथ ही कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में ‘संगठन सृजन अभियान' के तहत अपने सभी जिला अध्यक्षों की घोषणा पूरी कर ली है। इस अभियान का मकसद आने वाले चुनावों से पहले जमीनी स्तर पर संगठन को पूरी तरह मजबूत करना है।
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