Edited By Kuldeep, Updated: 24 Oct, 2026 06:43 PM

भारत की रक्षा, विदेश और आर्थिक नीतियां वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। आज देश कई बड़े राष्ट्रों को पीछे छोड़ते हुए काफी आगे निकल चुका है।
चम्बा (काकू चौहान): भारत की रक्षा, विदेश और आर्थिक नीतियां वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। आज देश कई बड़े राष्ट्रों को पीछे छोड़ते हुए काफी आगे निकल चुका है। हिमाचल प्रदेश को प्रकृति ने जल संपदा, वन संपदा, औषधीय पौधों और अपार सौंदर्य का वरदान दिया है। इन प्राकृतिक संसाधनों को आधार बनाकर पर्यटन, बागवानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है। यह बात राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने चम्बा चौगान में 'आत्मनिर्भर भारत - थर्ड डैस्टिनेशन हिमाचल एक्सपो 2026' मैगा प्रदर्शनी के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।
उन्होंने पर्यटन को केवल कुछ प्रसिद्ध हिल स्टेशनों तक सीमित न रखकर ग्रामीण, सांस्कृतिक, धार्मिक और साहसिक पर्यटन के साथ-साथ होमस्टे जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने लद्दाख कार्यकाल का अनुभव सांझा करते हुए राज्यपाल ने बताया कि किस प्रकार होमस्टे और बाइकर्स टूरिज्म ने स्थानीय लोगों की आजीविका में सकारात्मक बदलाव लाया था। राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को विकास के साथ संतुलित रखने की चेतावनी देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए पिछले वर्षों में आई आपदाओं से सबक लेते हुए हमें सतत और पर्यावरण-अनुकूल विकास का मॉडल अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि यह एक्सपो केवल एक मेला नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी प्रगति को आम जनमानस तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्टाल धारकों और अधिकारियों से आह्वान किया कि वे स्थानीय युवाओं और कारीगरों के साथ निरंतर संवाद स्थापित करें, उन्हें आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल विपणन और कौशल विकास का प्रशिक्षण दें। राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि यहां आने वाले युवा नए विचार, नए कौशल और नए संकल्प लेकर लौटेंगे तथा रोजगार पाने वाले बनने के बजाय रोजगार प्रदाता बनकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
उन्होंने कहा कि चम्बा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती पर इस महत्वपूर्ण एक्सपो में उपस्थित होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने सांसद डा. राजीव भारद्वाज और आविष्कार संस्था की पूरी टीम को इस दूरगामी पहल के लिए बधाई दी। राज्यपाल ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दूरदराज होने के बावजूद चम्बा में इस तरह की राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी का आयोजन अपने आप में सराहनीय है।
चम्बा की संस्कृति का जम्मू से जुड़ाव, विशेष आत्मीयता होती है महसूस
चम्बा केवल एक प्राकृतिक दृष्टि से सुंदर पर्यटन स्थल ही नहीं है, बल्कि यह प्राचीन मंदिरों, लोक संस्कृति, काष्ठ कला और पारंपरिक हस्तशिल्प का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यहां की संस्कृति का जुड़ाव उनके गृह क्षेत्र जम्मू से भी काफी मिलता-जुलता है, जिससे वे यहां एक विशेष आत्मीयता महसूस करते हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज का भारत एक अभूतपूर्व परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है।
विकास की किरणें समाज के अंतिम व्यक्ति व दूरदराज के गांव तक पहुंचें
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता और विकसित भारत 2047 के संकल्प को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस संकल्प की सिद्धि तभी संभव है जब विकास की किरणें समाज के अंतिम व्यक्ति और दूरदराज के गांवों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से समृद्ध होना नहीं, बल्कि ऐसा समाज बनाना है जहां युवाओं को असीम अवसर मिलें, महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण हो, किसानों की उत्पादकता बढ़े और स्थानीय उपक्रमों को व्यापक बाजार मिल सके।