Edited By Vijay, Updated: 29 Jul, 2026 02:48 PM

हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे में एक अधिकारी द्वारा अपने जूनियर कर्मचारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और विभागीय आदेशों की अवहेलना का एक गंभीर मामला सामने आया है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे में एक अधिकारी द्वारा अपने जूनियर कर्मचारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और विभागीय आदेशों की अवहेलना का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डीजीपी अशोक तिवारी ने ट्रैफिक, टूरिस्ट एंड रेलवे में तैनात एएसआई पुनीत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार पीड़ित कांस्टेबल एवं चालक पंकज ने डीजीपी को एक लिखित शिकायत सौंपी थी। पंकज ने बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती है और प्रसव में कुछ ही दिन शेष हैं। वर्तमान में उसकी पत्नी का इलाज शिमला के कमला नेहरू अस्पताल में चल रहा है। पंकज ने एएसआई को अपनी पारिवारिक स्थिति से अवगत कराते हुए सहयोग की अपेक्षा की थी, लेकिन एएसआई ने कथित तौर पर उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और द्वेषपूर्ण तरीके से उसका तबादला शिमला से कांगड़ा करवा दिया।
कांस्टेबल पंकज ने शिकायत में बताया कि बेहतरीन ड्यूटी के लिए उसे डीजीपी की ओर से उत्कृष्ट सेवा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया था। आरोप है कि इस सम्मान के बाद एएसआई पुनीत ने उसे ताने मारते हुए डीजीपी का मुखबिर कहना शुरू कर दिया। यही नहीं, एएसआई ने कांस्टेबल पर एक निलंबित अधिकारी की निजी गाड़ी धोने का दबाव बनाया। जब कांस्टेबल ने इंकार किया, तो उसके खिलाफ प्रताड़ना का सिलसिला और तेज कर दिया गया।
एएसआई पर केवल अपने जूनियर के उत्पीड़न का ही नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों को न मानने का भी आरोप है। विभागीय जानकारी के अनुसार एएसआई पुनीत का तबादला 24 जून को चौथी आईआरबीएन जंगलबैरी (हमीरपुर) किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने अपने नए तैनाती स्थल पर अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया। इसे प्रदेश सरकार के निर्देशों और हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम, 2007 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन माना गया।
इन तमाम गंभीर आरोपों और अनुशासनहीनता के पुख्ता प्रमाणों को देखते हुए डीजीपी अशोक तिवारी ने हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 89 के तहत कार्रवाई करते हुए एएसआई को तुरंत निलंबित कर दिया है। आधिकारिक आदेशों के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान एएसआई का मुख्यालय चौथी आईआरबीएन जंगलबैरी रहेगा। इसके साथ ही डीजीपी ने चौथी आईआरबीएन के कमांडैंट को निर्देश दिए हैं कि वे आरोपी एएसआई के खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच अमल में लाएं।
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