Edited By Vijay, Updated: 23 Oct, 2026 09:24 PM

देश के सबसे बड़े फार्मा हब हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की ओर से जारी नवीनतम मासिक ड्रग अलर्ट के अनुसार....
सोलन (नरेश पाल): देश के सबसे बड़े फार्मा हब हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की ओर से जारी नवीनतम मासिक ड्रग अलर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में निर्मित 95 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो देशभर में कुल 331 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। हिमाचल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों जैसे बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित कई दवा निर्माण इकाइयों के नाम इस सूची में शामिल हैं।
इन बीमारियों की दवाइयां हुईं फेल
यह मामला सीधे तौर पर आम जनमानस के स्वास्थ्य से जुड़ा है क्योंकि जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, वे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द और बुखार, खांसी, पेट संबंधी बीमारियों, आंखों की दवा, जीवनरक्षक इंजैक्शन और विटामिन उत्पादों के सैंपल मानकों पर असफल पाए गए हैं।
दवाओं में पाई गईं ये कमियां
प्रयोगशाला में हुई जांच के दौरान कई नमूनों में दवा के शरीर में घुलने की क्षमता, सक्रिय औषधीय तत्वों की निर्धारित मात्रा में कमी और दवाओं के रोगाणुरहित न होने जैसी गंभीर कमियां पाई गई हैं। इतनी बड़ी संख्या में दवाओं के सैंपल फेल होने से इन औद्योगिक इकाइयों के क्वालिटी कंट्रोल और निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
उत्तराखंड की 69 दवाओं के सैंपल फेल, अन्य राज्यों का भी बुरा हाल
दवाओं के फेल होने के मामले में हिमाचल प्रदेश के बाद पड़ोसी राज्य उत्तराखंड दूसरे स्थान पर है। राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड की 69 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र की 23, मध्य प्रदेश की 22, हरियाणा की 21, राजस्थान की 17, गुजरात और तमिलनाडु की 15-15, तथा पंजाब की 13 दवाओं के नमूने भी जांच में असफल साबित हुए हैं।
कंपनियों को नोटिस जारी, बिक्री पर लगी रोक
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए हिमाचल के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों की दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही बाजार में मौजूद संबंधित दवाओं के खराब बैच की बिक्री और वितरण पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। डॉ. कपूर ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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