Edited By Vijay, Updated: 27 Sep, 2026 02:07 PM

युवाओं में नौकरी की होड़ के बीच हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर (पुराना बाजार) के रहने वाले अंकित कुमार ने स्वरोजगार की एक नई और प्रेरक मिसाल पेश की है।
सुंदरनगर (रजनीश): युवाओं में नौकरी की होड़ के बीच हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर (पुराना बाजार) के रहने वाले अंकित कुमार ने स्वरोजगार की एक नई और प्रेरक मिसाल पेश की है। महज 12वीं तक पढ़े अंकित ने नौकरी के पीछे भागने की बजाय मशरूम उत्पादन को अपनी आजीविका का साधन बनाया। आज वे अपनी कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक सोच की बदौलत एक सफल उद्यमी बन चुके हैं और प्रतिमाह लगभग डेढ़ लाख रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
200 बैग और 6 महीने की ट्रेनिंग से हुई शुरूआत
अंकित की सफलता रातों-रात नहीं मिली। उन्होंने इस व्यवसाय की शुरुआत महज 200 बैग बटन मशरूम से की थी। इससे पहले उन्होंने एक मशरूम फार्म में करीब छह-सात महीने तक काम किया ताकि इस व्यवसाय की जमीनी बारीकियों को समझ सकें। इसके बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर से बाकायदा प्रशिक्षण प्राप्त किया और वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा।
कम जगह में वर्टिकल फार्मिंग का किया शानदार इस्तेमाल
लगातार अनुभव और मेहनत से अंकित ने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और बटन के साथ-साथ ढींगरी मशरूम भी उगाना शुरू किया। आज उनकी उत्पादन क्षमता 7,000 बैग्स तक पहुंच गई है। अंकित ने बताया कि उन्होंने करीब 80×80 फुट की सीमित जगह में वर्टिकल फार्मिंग तकनीक अपनाई है, जिससे कई परतों में उत्पादन किया जा रहा है। वे हर महीने करीब 20 क्विंटल मशरूम सब्जी मंडियों में सप्लाई कर रहे हैं।

पूर्ण रूप से प्राकृतिक और जैविक खेती
अंकित के फार्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मशरूम का उत्पादन पूरी तरह प्राकृतिक एवं जैविक तरीके से किया जाता है। फसल में किसी भी प्रकार के रासायनिक पेस्टिसाइड, इंसेक्टिसाइड या फंगीसाइड का इस्तेमाल नहीं होता। इस व्यवसाय में उनकी पत्नी चरणजीत कौर भी उनका पूरा सहयोग करती हैं और आवश्यकतानुसार वे स्थानीय लोगों को दिहाड़ी पर रोजगार भी मुहैया कराते हैं।
हिमाचल के बाद पंजाब में भी गाड़े झंडे
अंकित की उद्यमशीलता अब केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए पंजाब के भरतगढ़ के पास भी एक नई मशरूम यूनिट स्थापित की है। वहां बांस से बने हट्स में उत्पादन किया जा रहा है। वे जलवायु के अनुसार किस्मों का चयन करते हैं, पंजाब के गर्म तापमान के लिए अलग किस्म और सुंदरनगर के ठंडे मौसम के लिए अलग किस्म उगाई जाती है।

सरकारी योजना से मिला संबल
अंकित की इस यात्रा में सरकारी योजनाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है। उद्यान विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ राजेश कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में हिमाचल खुम्ब विकास योजना के तहत अंकित को मशरूम शैड निर्माण के लिए 50 हजार रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की गई थी। उन्होंने बताया कि सुंदरनगर उपमंडल में इस योजना के 26 लाभार्थी हैं, जिन्हें विभाग द्वारा वित्तीय, तकनीकी और रोग नियंत्रण संबंधी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
युवाओं के लिए दिया संदेश
अंकित ने सहयोग के लिए हिमाचल सरकार और उद्यान विभाग का आभार जताया है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि युवा केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहें। कृषि और बागवानी आधारित व्यवसायों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। छोटी शुरूआत, निरंतर मेहनत, उचित प्रशिक्षण और सही दिशा से किसी भी व्यवसाय को एक बड़े मुकाम तक पहुंचाया जा सकता है।
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