प्लास्टिक की कर दी छुट्टी! मंडी की स्मार्ट महिलाओं ने पत्तों से खड़ा किया लाखों का बिजनैस, मोबाइल पर ले रहीं ऑर्डर

Edited By Vijay, Updated: 11 Apr, 2026 12:51 PM

women of mandi

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर वे आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं।

मंडी (रजनीश): हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर वे आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। मंडी जिला मुख्यालय के समीप बिहनधार गांव का ज्योति स्वयं सहायता समूह इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां की महिलाएं टौर के पत्तों से पारंपरिक और इको-फ्रैंडली पत्तल-डूने बनाकर न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही हैं, बल्कि अपनी आर्थिकी को भी मजबूत कर रही हैं।

मशीन मिलने से दोगुनी हुई आय
ज्योति स्वयं सहायता समूह की सचिव हेती देवी ने बताया कि वह वर्ष 2018 से इस समूह से जुड़ी हैं। शुरूआती दौर में वे हाथों से पत्तलें बनाती थीं, जिससे उन्हें महीने में लगभग 5000 रुपए की आय होती थी, लेकिन वर्ष 2023 में उनके काम में एक बड़ा बदलाव आया। हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और विकास खंड मंडी के सहयोग से समूह को पत्तल बनाने की मशीन उपलब्ध कराई गई। इस तकनीक के जुड़ने से उनका उत्पादन बढ़ा और अब उनकी मासिक आय दोगुनी होकर 10,000 रुपए तक पहुंच गई है।

मोबाइल पर मिल रहे ऑर्डर, बाजार में भारी मांग
परंपरा और आधुनिकता के संगम से तैयार इन पत्तलों की गुणवत्ता बाजार में मौजूद अन्य विकल्पों से काफी बेहतर है। हेती देवी के अनुसार मशीन से बनी पत्तल 400 रुपए प्रति सैंकड़ा और हाथ से बनी पत्तल 200 रुपए प्रति सैंकड़ा की दर से बिक रही है। वहीं, मशीनी डूने 200 रुपए प्रति सैंकड़ा बिकते हैं। बदलते वक्त के साथ इन महिलाओं ने भी खुद को अपग्रेड किया है। अब वे बिक्री के लिए डिजिटल माध्यमों का बखूबी इस्तेमाल कर रही हैं और ग्राहकों के ऑर्डर सीधे मोबाइल पर ले रही हैं, जिससे समय की बचत के साथ मुनाफा भी बढ़ा है।

सालाना एक से डेढ़ लाख तक की कमाई, सरकार का जताया आभार
समूह की प्रधान तृप्ता देवी ने बताया कि उनके 6 सदस्यीय समूह को सरकार की ओर से 40,000 रुपए का रिवाल्विंग फंड मिला है। इस राशि का उपयोग समूह में इंटर-लोनिंग (आंतरिक ऋण) के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में यह समूह पत्तल निर्माण से सालाना एक से डेढ़ लाख रुपए तक की कमाई कर रहा है, जिससे सभी सदस्यों के परिवारों का खर्च सुचारू रूप से चल रहा है। महिलाओं ने इस सरकारी सहायता के लिए प्रदेश सरकार का विशेष आभार जताया है।

प्लास्टिक और थर्माकोल का है बेहतरीन विकल्प
मंडी क्षेत्र में टौर के पत्तों से बनी पत्तल और डूने का पारंपरिक महत्व है। विवाह और सामाजिक समारोहों में इनका उपयोग सदियों से होता आ रहा है। ये पत्तलें न केवल स्वच्छ हैं, बल्कि उपयोग के बाद आसानी से नष्ट हो जाती हैं। इस कारण ये पर्यावरण के लिए वरदान हैं और प्लास्टिक व थर्माकोल का एक सुरक्षित और इको-फ्रैंडली विकल्प पेश करती हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर महिला स्वावलंबन पर विशेष बल दिया जा रहा है। सरकार के निर्देशों के अनुसार मंडी जिला के सभी समूहों को सशक्त करने के लिए प्रशासन द्वारा हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।

क्या आपको भी लगता है कि प्लास्टिक की जगह इन पारंपरिक पत्तलों का ही इस्तेमाल होना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर दें। 

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