Edited By Vijay, Updated: 27 May, 2026 01:24 PM

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मोटर एक्सीडैंट क्लेम ट्रिब्यूनल सुंदरनगर ने एक अहम फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले 18 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र के माता-पिता के हक में फैसला सुनाते हुए...
मंडी (रजनीश): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मोटर एक्सीडैंट क्लेम ट्रिब्यूनल सुंदरनगर ने एक अहम फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले 18 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र के माता-पिता के हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें 14,44,800 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने जिम्मेदारी से बचने के लिए बीमा कंपनी द्वारा दी गई नशे और बिना हैल्मेट की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
2019 में हुआ था हादसा
यह दर्दनाक हादसा 21 अक्तूबर, 2019 की रात करीब 12 बजे सुंदरनगर के धनोटू के पास हुआ था। मृतक 18 वर्षीय अविनाश तरोट (कनैड़) स्थित सिरडा ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूशंस में सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा के तीसरे सैमेस्टर का छात्र था। उस मनहूस रात अविनाश अपने दोस्त मयंक के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा था। धनोटू के पास उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित होकर फिसल गई। इस हादसे में अविनाश के सिर और तिल्ली पर बेहद गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उसकी दुखद मौत हो गई थी।
बीमा कंपनी की बहानेबाजी नहीं आई काम
इस हादसे के बाद अविनाश के माता-पिता ने जब संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क किया तो कंपनी ने बीमा राशि देने में आनाकानी की, जिसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने मुआवजा देने से बचने की पूरी कोशिश की। कंपनी के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि हादसे के वक्त बाइक चालक नशे में था और बिना हैल्मेट के ट्रिपल राइडिंग की जा रही थी। हालांकि मोटर एक्सीडैंट क्लेम ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी की अदालत ने इन दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए ठुकरा दिया और स्पष्ट किया कि मुआवजे के भुगतान की मुख्य जिम्मेदारी बीमा कंपनी की ही होगी।
6 प्रतिशत वार्षिक दर से देना होगा ब्याज
हादसे में अपने जवान बेटे को खोने के बाद अविनाश के माता-पिता ने ट्रिब्यूनल में 1 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। अदालत ने सभी पहलुओं की जांच के बाद 14,44,800 रुपए की राशि तय की है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि बीमा कंपनी को याचिका दायर करने की तिथि से लेकर भुगतान होने तक इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।
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