Edited By Vijay, Updated: 07 Jun, 2026 04:23 PM

जिला सिरमौर के मैदानी इलाकों में जंगली हाथियों का आवागमन लगातार जारी है। इसी कड़ी में सतीवाला क्षेत्र में हाथियों की आमद से एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
नाहन (आशु): जिला सिरमौर के मैदानी इलाकों में जंगली हाथियों का आवागमन लगातार जारी है। इसी कड़ी में सतीवाला क्षेत्र में हाथियों की आमद से एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। रविवार को उत्तराखंड की ओर से आए हाथियों के एक झुंड ने सतीवाला निवासी केहर सिंह पुत्र फूल सिंह की निजी भूमि में घुसकर आम के 6 पेड़ों को जड़ों से उखाड़ दिया, जिससे उन्हें नुक्सान उठाना पड़ा।
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिले पैरों के निशानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह अनुमान लगाया गया कि क्षेत्र में 3 से 4 हाथियों का झुंड आया था। वन विभाग के अनुसार यह झुंड उत्तराखंड के वन क्षेत्रों से हिमाचल प्रदेश में प्रवेश कर सतीवाला तक पहुंचा और बगीचे में नुक्सान पहुंचाने के बाद सतीवाला बीट के आरक्षित वन क्षेत्र मस्तअली की ओर चला गया।
गौरतलब है कि पांवटा साहिब घाटी में उत्तराखंड से जंगली हाथियों का प्रवेश पहले भी होता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में उनकी गतिविधियां पहले की तुलना में अधिक क्षेत्रों तक फैलती दिखाई दे रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन और पानी की तलाश में हाथी अपने पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़ रहे हैं, जिसके चलते कई बार उनका सामना आबादी वाले क्षेत्रों से हो जाता है। यही कारण है कि घाटी के कई गांवों में किसानों और बागवानों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है।
वन विभाग द्वारा पिछले कुछ वर्षों में आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों की घुसपैठ रोकने के लिए विभिन्न प्रबंध किए गए हैं। इसके चलते रिहायशी इलाकों में हाथियों की आवाजाही में कमी आई है, हालांकि जंगलों और उनसे सटे क्षेत्रों में उनकी गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही हैं। विभाग का मानना है कि जंगलों में हाथियों की मौजूदगी उनके प्राकृतिक विचरण क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन आबादी वाले क्षेत्रों के समीप उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। हाथियों के नजदीक जाने, उन्हें छेड़ने अथवा स्वयं भगाने का प्रयास करने के बजाय तुरंत विभाग को सूचना दें। विभाग का कहना है कि हाथी सामान्यतः शांत स्वभाव के होते हैं, लेकिन खतरा महसूस होने पर आक्रामक भी हो सकते हैं। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि लोगों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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