Edited By Swati Sharma, Updated: 12 Jul, 2026 11:12 AM

Hamirpur News : किसी बच्चे के सिर से अगर उसके माता-पिता का साया ही उठ जाए तो फिर उसका इस संसार में और कौन सहारा हो सकता है? ऐसे बच्चों के कई अन्य परिजन या रिश्तेदार उन्हें विपदा की घड़ी में कुछ समय के लिए तो सहारा दे सकते हैं, लेकिन इस संसार में...
Hamirpur News : किसी बच्चे के सिर से अगर उसके माता-पिता का साया ही उठ जाए तो फिर उसका इस संसार में और कौन सहारा हो सकता है? ऐसे बच्चों के कई अन्य परिजन या रिश्तेदार उन्हें विपदा की घड़ी में कुछ समय के लिए तो सहारा दे सकते हैं, लेकिन इस संसार में माता-पिता का स्थान कोई और नहीं ले सकता है। वे उम्र भर मां-बाप के प्यार-दुलार और सहारे के लिए तरसते रहते हैं। ऐसी परिस्थितियां इन अभागे बच्चों को भावनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेसहारा कर देती हैं। लेकिन, हिमाचल प्रदेश में साढे तीन वर्ष पूर्व जब ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला तो उन्होंने सबसे पहले इन्हीं बच्चों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया।
ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना आरंभ करके इन बेसहारा बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ स्टेट’ का दर्जा प्रदान करते हुए 27 वर्ष तक की आयु तक इनकी देखभाल का जिम्मा लिया। प्रदेश सरकार ने मां-बाप की तरह इन बच्चों की परवरिश, शिक्षा, उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा, स्वरोजगार, मकान निर्माण और शादी तक की जिम्मेदारी लेकर देश-विदेश में एक अनूठी मिसाल पेश की। आज इसी योजना के कारण हिमाचल प्रदेश के हजारों बेसहारा बच्चे और युवा न केवल सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं, बल्कि अपने लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में सक्षम हो रहे हैं। इन्हीं बच्चों एवं युवाओं में से एक हैं हमीरपुर के निकटवर्ती क्षेत्र मझोग सुल्तानी के गांव पंजयाली के लिए एस्ले वर्मा। वर्ष 2007 में माता के देहांत के बाद एस्ले वर्मा, उसके छोटे भाई और बड़ी बहन अपने पिता के साथ रह रहे थे। ये किशोरावस्था पार कर ही रहे थे कि वर्ष 2020 में इनके पिता का भी स्वर्गवास हो गया। अब इनके सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया। अन्य परिजन एवं रिश्तेदार एस्ले और उसके भाई-बहन की मदद कर रहे थे, लेकिन इन बच्चों को अपने भविष्य की चिंता सता रही थी। लगभग साढ़े तीन वर्ष पूर्व जब मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना आरंभ हुई तो एस्ले वर्मा और उसके भाई-बहन को एक नई उम्मीद जगी। क्योंकि, इस योजना में बेसहारा बच्चों एवं युवाओं के लिए 27 वर्ष की आयु तक हर महीने 4000 रुपये की धनराशि के अलावा उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा, स्वरोजगार, मकान निर्माण और शादी के लिए भी आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है।
इसी योजना के सहारे एस्ले वर्मा अभी जेबीटी का कोर्स और छोटा भाई आईटीआई डिप्लोमा कर रहा है। बहन की शादी हो गई है। इन्हें आवास योजना के तहत डेढ़ लाख रुपये की धनराशि भी मिली है और कुछ अन्य साधनों से भी मदद प्राप्त होने के बाद अब इनका मकान भी लगभग तैयार हो चुका है। प्रदेश सरकार की मदद से उनका पक्के मकान का सपना साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए एस्ले वर्मा ने बताया कि बेसहारा बच्चों के कल्याण एवं उत्थान के लिए मुख्यमंत्री ने बहुत ही सराहनीय योजना आरंभ की है। प्रदेश के हजारों बेसहारा बच्चों यह योजना एक वरदान साबित हो रही है।
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