Himachal: सांप काटने पर अब नहीं जाएगी जान! 108 एंबुलैंस में मिलेगी एंटी-स्नेक वेनम सुविधा

Edited By Vijay, Updated: 04 Jul, 2026 12:16 PM

snake bites will no longer be fatal in himachal

हिमाचल प्रदेश में अब सांप के काटने पर मरीजों को रास्ते में ही 108 एम्बुलैंस के भीतर एंटी-स्नेक वैनम का तुरंत इलाज मिलना शुरू हो जाएगा। इसी जीवन रक्षक पहल को मजबूत करने और सांप के डंक से होने वाली मौतों को रोकने के लिए आज धर्मशाला में एक राज्य स्तरीय...

धर्मशाला (सुनील): हिमाचल प्रदेश में अब सांप के काटने पर मरीजों को रास्ते में ही 108 एम्बुलैंस के भीतर एंटी-स्नेक वैनम का तुरंत इलाज मिलना शुरू हो जाएगा। इसी जीवन रक्षक पहल को मजबूत करने और सांप के डंक से होने वाली मौतों को रोकने के लिए आज धर्मशाला में एक राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल प्रदेश द्वारा आयोजित इस बैठक में सांप के काटने से बचाव और नियंत्रण के लिए स्टेट एक्शन प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। 

आईसीएमआर ने विशेष डैमोंस्ट्रेशन साइट के रूप में चुना कांगड़ा
इंडियन काऊंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने इस मुहिम के तहत कांगड़ा जिले को एक विशेष डैमोंस्ट्रेशन साइट के रूप में चुना है। बैठक में देश और प्रदेश के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ, वन विभाग, आपदा प्रबंधन और पंचायती राज सहित कई विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।  इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में साल 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतों और विकलांगता को 50 फीसदी तक कम करना है।  प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 26 फरवरी को ही सांप के डंक को एक अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया है, जिसके तहत अब सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों के लिए सांप के काटने के हर मामले की रिपोर्ट करनी अनिवार्य होगी।

2030 तक मौतों को आधा करने का लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सांप का काटना एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, विशेषकर कांगड़ा, ऊना, चम्बा, मंडी और सिरमौर जैसे जिलों में मानसून के दौरान इसके मामले काफी बढ़ जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर साल करीब 76 लोगों की मौत सांप के काटने से हो जाती है। इस नई नीति के जरिए स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि विभिन्न विभागों के साथ मिलकर वर्ष 2030 तक इन मौतों को आधा किया जा सके। इसके लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर बड़े अस्पतालों तक एंटी-स्नेक वैनम की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।  

क्या कहते हैं जिला स्वास्थ्य अधिकारी
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि कांगड़ा जिला सांप के काटने के मामलों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, इसीलिए आईसीएमआर ने हमारे जिले को अपनी विशेष परियोजना के लिए चुना है। आज होने वाली इस राज्य स्तरीय बैठक में सभी विभागों के समन्वय से एक मजबूत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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