Himachal News: शिव भक्तों के लिए बड़ी खबर, किन्नर कैलाश यात्रा पर प्रशासन ने लगाई रोक, जानें क्या है वजह

Edited By Vijay, Updated: 28 Jun, 2026 06:15 PM

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले से शिव भक्तों के लिए एक जरूरी खबर है। जिला प्रशासन किन्नौर ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किन्नर कैलाश यात्रा-2026 को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया है।

रिकांगपिओ (रिपन): हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले से शिव भक्तों के लिए एक जरूरी खबर है। जिला प्रशासन किन्नौर ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किन्नर कैलाश यात्रा-2026 को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया है। यह अहम निर्णय यात्रा मार्ग पर मौजूद बड़े ग्लेशियरों, भूस्खलन, खिसकती चट्टानों और अन्य प्राकृतिक खतरों के भारी जोखिम को देखते हुए लिया गया है।

1 जुलाई से शुरू होनी थी यात्रा
कल्पा के एसडीएम और किन्नर कैलाश यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार भारद्वाज ने बताया कि 12 जून को राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में तय हुआ था कि इस वर्ष किन्नर कैलाश यात्रा 1 जुलाई से 30 जुलाई के बीच करवाई जाएगी।

रैकी टीम की रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे
तय कार्यक्रम के अनुसार यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग की सुरक्षा और व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए एक विशेष रैकी टीम का गठन किया गया था। वन विभाग और जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी में इस टीम ने 21 जून को पूरे यात्रा मार्ग का विस्तृत निरीक्षण किया। रैकी टीम की जो रिपोर्ट सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार मिलिंग खट्टा से लेकर शिवलिंग तक के मार्ग पर बहुत बड़े-बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं। इन ग्लेशियरों के ऊपर विशालकाय चट्टानें बेहद अस्थिर स्थिति में टिकी हुई हैं। गुफा से सोरंग के बीच कई स्थानों पर पहाड़ों से भारी बोल्डर (चट्टानें) गिरे हैं, जिसकी वजह से रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है। रास्ते में फंसी ये चट्टानें अभी भी अस्थिर हैं और किसी भी पल नीचे गिर सकती हैं, ऐसे में यहां से गुजरने वाले यात्रियों की जान को गंभीर खतरा है।

प्रशासन की सख्त अपील, जोखिम न लें श्रद्धालु
इन जानलेवा परिस्थितियों का बारीकी से आकलन करने के बाद ही जिला प्रशासन ने किन्नर कैलाश यात्रा-2026 को तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा तभी शुरू की जाएगी, जब मार्ग को पूरी तरह से सुरक्षित घोषित कर दिया जाएगा। तब तक प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं और ट्रैकरों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर वर्तमान मार्ग पर बिल्कुल भी यात्रा न करें।

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