Shimla: मनरेगा के नए नियमों से हिमाचल पर पड़ेगा 1000 करोड़ का वित्तीय बोझ : अनिरुद्ध

Edited By Kuldeep, Updated: 25 Jun, 2026 05:49 PM

shimla mgnrega rules

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने केंद्र सरकार की मनरेगा नीतियों और बजट कटौती की आलोचना की है।

शिमला (संतोष): ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने केंद्र सरकार की मनरेगा नीतियों और बजट कटौती की आलोचना की है। शिमला में प्रैसवार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्थाओं और बजट आबंटन में कटौती से पहाड़ी राज्यों पर भारी आर्थिक संकट पैदा होगा। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ने के बजाय घटी है। गैर-जनजातीय क्षेत्रों में यह 320 से घटाकर मात्र 247 और जनजातीय क्षेत्रों में 309 कर दी गई है। केंद्र ने राज्य सरकार को अपनी तरफ से मजदूरों के लिए अतिरिक्त राशि जोड़ने की अनुमति भी नहीं दी है। योजना को 90:10 के अनुपात में बदलने से हिमाचल पर सालाना 800 से 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। फंड रोके जाने के कारण फरवरी से 1194 मनरेगा कर्मचारियों और जी.आर.एस. का करीब 20 करोड़ रुपए का वेतन केंद्र के पास फंसा हुआ है।

उन्होंने कहा कि कार्य दिवसों में गिरावट की गई है। हिमाचल में पहले 395 लाख कार्य दिवस अर्जित हुए थे, जिसके इस वर्ष घटकर मात्र 2 लाख रह जाने की आशंका है। अब कांगड़ा, मंडी या रोहड़ू जैसे क्षेत्रों में काम की मंजूरी भी नए सॉफ्टवेयर के जरिए सीधे दिल्ली से तय होगी। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनैट के अभाव के कारण नई अनिवार्य जीपीएस और बायोमीट्रिक हाजिरी प्रणाली पूरी तरह से अव्यावहारिक है। उन्होंने प्रदेश के भाजपा सांसदों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि स्थानीय नेताओं में गलत नीतियों के खिलाफ केंद्र के सामने सच बोलने की हिम्मत नहीं है।

मंत्री ने बताया कि इन सख्त नियमों से राहत पाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू केंद्र को पत्र लिख रहे हैं। इसके अलावा वह स्वयं भी जल्द ही केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर हिमाचल के मजदूरों की स्थिति और रोजगार के संकट से उन्हें अवगत करवाएंगे।

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