Shimla: देश में तेल के दाम जाएंगे 150 के पार, केंद्र सरकार की आर्थिक नीति फेल : नेगी

Edited By Kuldeep, Updated: 19 May, 2026 08:10 PM

shimla oil expensive

बागवानी एवं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार की आर्थिक व विदेश नीति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आने वाले समय में पैट्रोल और डीजल के दाम 150 रुपए प्रति लीटर से भी अधिक हो सकते हैं।

शिमला (भूपिन्द्र): बागवानी एवं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार की आर्थिक व विदेश नीति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आने वाले समय में पैट्रोल और डीजल के दाम 150 रुपए प्रति लीटर से भी अधिक हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनावों के दौरान तेल कीमतें न बढ़ाना केवल चुनावी स्टंट था। मंगलवार को शिमला में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में नेगी ने कहा कि बंगाल, केरल, तमिलनाडु और असम विधानसभा चुनावों के दौरान कुछ समय के लिए तेल कीमतों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन बाद में लगातार दाम बढ़ाए गए।

उन्होंने कहा कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम थे, तब भी देश में पैट्रोल-डीजल महंगे बिक रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत रूस से भी तेल आयात कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत से रिफाइंड तेल को पड़ोसी देशों नेपाल व बंगलादेश समेत अन्य देशों को सस्ते दामों पर निर्यात किया जा रहा है, जबकि देश के उपभोक्ताओं पर भारी सैस लगाया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सैस से प्राप्त लाखों करोड़ रुपए कहां खर्च किए गए।

मंत्री ने कहा कि महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है और गांवों में लोगों की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा की आर्थिक नीतियों के कारण देश आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है तथा गोल्ड रिजर्व में भी गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व यूपीए सरकार के समय पैट्रोल 56 रुपए प्रति लीटर था, जबकि आज कीमतें 100 रुपए से ऊपर पहुंच चुकी हैं। उन्होंने मीडिया पर भी तेल कीमतों को लेकर सरकार का पक्ष लेने का आरोप लगाया। नेगी ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान आंदोलनों के जरिए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, लेकिन वे आज तक साबित नहीं हुए। वहीं उन्होंने वर्तमान सरकार के दौरान बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया।

बड़ी संख्या में जीते कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार
नगर निकाय चुनावों को लेकर नेगी ने कहा कि भाजपा ने जिला परिषद से लेकर वार्ड स्तर तक उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जबकि कांग्रेस ने कोई सूची जारी नहीं की। इसके बावजूद कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार बड़ी संख्या में जीते हैं। उन्होंने दावा किया कि नगर पंचायत और नगर परिषदों के गठन के बाद अध्यक्ष पदों पर कांग्रेस का कब्जा दिखाई देगा।

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