Edited By Kuldeep, Updated: 14 May, 2026 09:15 PM

हाईकोर्ट ने फोरलेन निर्माण के कारण शिमला के भट्टाकुफर में बहुमंजिला रिहायशी मकान गिरने से जुड़े मामले में मुख्य सचिव सहित एनएचएआई, डीसी व एसडीएम ग्रामीण शिमला से पूछा है कि क्या भवन मालिक रंजना देवी को मुआवजा दिया गया है या नहीं।
शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने फोरलेन निर्माण के कारण शिमला के भट्टाकुफर में बहुमंजिला रिहायशी मकान गिरने से जुड़े मामले में मुख्य सचिव सहित एनएचएआई, डीसी व एसडीएम ग्रामीण शिमला से पूछा है कि क्या भवन मालिक रंजना देवी को मुआवजा दिया गया है या नहीं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को कंस्ट्रक्शन कंपनी गावर ने कोर्ट को बताया कि प्रतिवेदन करने वाली महिला चंदा देवी का मकान नहीं गिरा था बल्कि रंजना देवी का मकान गिरा था। उल्लेखनीय है कि भवन मालिक चंदा देवी ने मुआवजे की मांग को लेकर मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। मुख्य न्यायाधीश ने पत्र पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, उपायुक्त शिमला, एसडीएम (ग्रामीण) शिमला और ग्राम पंचायत चमियाना को नोटिस जारी किया था।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण कार्य करने वाली कंपनी मैसर्स गावर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड, को इसके प्रबंध निदेशक के माध्यम से प्रतिवादी बनाने के आदेश भी दिए थे। पत्र में कहा गया था कि वह एक साढ़े तीन मंजिला इमारत की मालिक थी, जो भट्टाकुफर में हाल ही में हुई बारिश के दौरान गिर गई है। आरोप लगाया गया था कि इमारत राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर शकराल गांव से ढली सैक्शन (शिमला बाईपास) तक चार लेन के निर्माण कार्य के कारण गिरी। इसलिए प्रतिवादियों से मुआवजे का दावा किया गया था। अब कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कोर्ट के नाम पत्र लिखने वाली महिला द्वारा उसके भवन के गिरने संबंधी बात से इनकार किया गया है।