Shimla: हाईकोर्ट की सरकार के फैसले पर रोक, आशा वर्कर लड़ सकेंगी पंचायत चुनाव

Edited By Kuldeep, Updated: 06 May, 2026 10:24 PM

shimla high court government decision stay

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें आशा वर्करों को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।

शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें आशा वर्करों को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने रीना देवी व अन्यों द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात यह रोक लगाते हुए राज्य सरकार सहित राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किए। मामले पर अगली सुनवाई 1 जून को निर्धारित की गई है।

याचिकाकर्त्ताओं का कहना था कि वे सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आतीं, इसलिए उन्हें पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में हिस्सा लेने से रोकने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। याचिकाकर्त्ताओं की शिकायत थी कि 2.05.2026 के संचार/स्पष्टीकरण के माध्यम से आशा कार्यकर्त्ताओं को एक निश्चित मासिक मानदेय और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन के साथ अंशकालिक आधार पर कार्यरत माना गया है और इसलिए उन्हें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(जी) के तहत पंचायतों के पदाधिकारी के रूप में चुने जाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि आशा वर्कर सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!