Himachal: कुल्लू की बेटी ने रचा इतिहास! 6081 मीटर ऊंची शिंकुन ईस्ट पीक पर लहराया तिरंगा

Edited By Vijay, Updated: 21 Aug, 2026 10:39 PM

sakshi thakur waved the tricolor on 6081 meter high peak

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के सोलंग गांव (मनाली) की होनहार पर्वतारोही साक्षी ठाकुर ने इतिहास रच दिया है। साक्षी ने लाहौल घाटी में स्थित 6081 मीटर (लगभग 19,950 फुट) ऊंची और बेहद दुर्गम शिंकुन ईस्ट पीक पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की है।

कुल्लू (दिलीप): हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के सोलंग गांव (मनाली) की होनहार पर्वतारोही साक्षी ठाकुर ने इतिहास रच दिया है। साक्षी ने लाहौल घाटी में स्थित 6081 मीटर (लगभग 19,950 फुट) ऊंची और बेहद दुर्गम शिंकुन ईस्ट पीक पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की है। 17 अगस्त को इस कठिन चोटी पर पहुंचकर उन्होंने भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया और पर्वतारोहण की दुनिया में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

खराब मौसम और बर्फीली हवाओं को दी मात
साक्षी ठाकुर का यह अभियान कतई आसान नहीं था। शिंकुन ईस्ट पीक अपनी अत्यधिक तकनीकी और बिल्कुल सीधी चढ़ाई के लिए जानी जाती है। अभियान के अंतिम चरण में मौसम ने भी कड़ी परीक्षा ली। शून्य से नीचे का तापमान, लगातार हो रही बर्फबारी और बर्फीली हवाओं ने चढ़ाई को जानलेवा और जोखिम भरा बना दिया था। इसके बावजूद, साक्षी ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। रास्ते में आने वाली खतरनाक व खड़ी दरारों को पार करते हुए उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और शिखर पर पहुंचकर प्रदेश का मान बढ़ाया।

मैराथन चैंपियन से पर्वतारोही बनने तक का सफर
मनाली के सोलंग गांव के एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाली साक्षी बचपन से ही साहसिक खेलों (एडवेंचर स्पोर्ट्स) की शौकीन रही हैं। पहाड़ों में पली-बढ़ी होने के कारण उनकी शारीरिक क्षमता और स्टेमिना हमेशा से बेहतरीन रहा है। पर्वतारोहण में यह मुकाम हासिल करने से पहले, साक्षी एक उत्कृष्ट धाविका भी रह चुकी हैं। उन्होंने मनाली मैराथन की 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन) श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। मैराथन से मिली इसी शारीरिक और मानसिक मजबूती ने उन्हें इस कठिन चढ़ाई में अप्रत्याशित मदद की।

इलाके में जश्न, युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
साक्षी की इस ऐतिहासिक सफलता की खबर जैसे ही उनके गृह क्षेत्र मनाली और पैतृक गांव सोलंग पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रशासनिक अधिकारियों, खेल संगठनों और स्थानीय लोगों ने साक्षी व उनके परिवार को इस गौरवमयी उपलब्धि पर बधाइयां दी हैं। ग्रामीणों और खेल प्रेमियों का कहना है कि साक्षी की यह कामयाबी विशेष रूप से उन युवा लड़कियों के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहती हैं।

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