Sirmaur: जहां सांस लेना भी चुनौती, वहां दोस्तों संग पहुंच गया नाहन का राघव, युवाओं को दिया फिटनैस का मंत्र

Edited By Vijay, Updated: 29 May, 2026 08:08 PM

raghav from nahan reaches place where even breathing is a challenge

जिस स्थान पर सामान्य व्यक्ति के लिए कुछ कदम चलना भी चुनौती बन जाता है, वहां तक पहुंचकर नाहन से ताल्लुक रखने वाले युवा राघव तोमर ने साहस, फिटनैस और मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय दिया है।

नाहन (आशु): जिस स्थान पर सामान्य व्यक्ति के लिए कुछ कदम चलना भी चुनौती बन जाता है, वहां तक पहुंचकर नाहन से ताल्लुक रखने वाले युवा राघव तोमर ने साहस, फिटनैस और मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। राघव तोमर पुत्र विशाल तोमर ने अपने 3 मित्रों श्रीयम केसरवानी (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश), कुशाग्र मिश्रा (नैनीताल, उत्तराखंड) और कुणाल गर्ग (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) के साथ दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क उमलिंग ला पास तक पहुंचकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

दरअसल, उमलिंग ला पास लद्दाख क्षेत्र में भारत-चीन सीमा के समीप स्थित एक प्रसिद्ध दर्रा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 19024 फुट (5798 मीटर) है। विश्व की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क होने के कारण इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यह सड़क लद्दाख के दूरस्थ सीमावर्ती गांव चिसुमले और डेमचोक को जोड़ती है। समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह क्षेत्र रोमांच प्रेमियों और बाइकर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यहां तक पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं माना जाता।

इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य स्थानों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है, ऐसे में सांस लेने में दिक्कत, सिरदर्द, थकान और ऊंचाई से जुड़ी अन्य समस्याएं आम बात हैं। इसके अलावा तेज बर्फीली हवाएं, बेहद कम तापमान, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और बदलता मौसम इस सफर को और भी कठिन बना देते हैं। यही वजह है कि उमलिंग ला पास को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण एडवैंचर रूट्स में गिना जाता है।

राघव ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे उनकी नियमित फिटनैस, अनुशासित दिनचर्या और लगातार की गई मेहनत का बड़ा योगदान है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शरीर की क्षमता की असली परीक्षा होती है। उमलिंग ला पास तक पहुंचना लंबे समय से उनका सपना था और इसे पूरा करने के लिए उन्होंने विशेष तैयारी की थी। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य और फिटनैस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवा नियमित व्यायाम करें, अनुशासित जीवनशैली अपनाएं और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर मैं यह कर सकता हूं तो आप भी कर सकते हैं, बस अपने स्वास्थ्य और फिटनैस को प्राथमिकता देनी होगी।

राघव की इस उपलब्धि पर उनके पिता विशाल तोमर, माता पूजा तोमर सहित परिवार के अन्य सदस्यों, मित्रों और क्षेत्र के लोगों ने खुशी व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि युवाओं की ऐसी उपलब्धियां न केवल दूसरों को प्रेरित करती हैं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!