Edited By Vijay, Updated: 15 Sep, 2026 08:21 PM

सतलुज जल विद्युत परियोजना (चरण-2) से प्रभावित क्षेत्रों की लंबे समय से हो रही अनदेखी को लेकर मंगलवार को करसोग में लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। स्थानीय विधायक दीप राज के नेतृत्व में प्रभावित पंचायतों (मंगन, परलोग, बेलूधांक सहित अन्य) के ग्रामीणों ने...
करसोग (धर्मवीर): सतलुज जल विद्युत परियोजना (चरण-2) से प्रभावित क्षेत्रों की लंबे समय से हो रही अनदेखी को लेकर मंगलवार को करसोग में लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। स्थानीय विधायक दीप राज के नेतृत्व में प्रभावित पंचायतों (मंगन, परलोग, बेलूधांक सहित अन्य) के ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छोटे-छोटे स्कूली बच्चे भी अपनी मूलभूत सुविधाओं की मांग लेकर पहुंचे, जिसने पूरे आंदोलन को एक भावनात्मक रूप दे दिया।
अढ़ाई घंटे तक कार्यालय के बाहर डटे रहे लोग
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने एसडीएम कार्यालय के भीतर प्रभावितों की समस्याएं सुनने के लिए बैठक बुलाई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी इस पर राजी नहीं हुए। उनकी मांग थी कि अधिकारी बाहर आकर जनता के बीच बैठें। करीब अढ़ाई घंटे तक लोग कार्यालय के बाहर डटे रहे, जिससे मिनी सचिवालय और न्यायालय मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ। अंततः माहौल को बिगड़ता देख एसडीएम और परियोजना अधिकारियों को बाहर आकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी पड़ी, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।
विधायक का आरोप, करसोग के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार
धरने को संबोधित करते हुए करसोग के विधायक दीप राज ने एसजेवीएनएल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रबंधन प्रभावित क्षेत्र की जनता को गुमराह कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिमला ग्रामीण के प्रभावित क्षेत्रों को करसोग की अपेक्षा अधिक बजट दिया गया है। करसोग की जनता आज भी सड़कों के लिए संघर्ष कर रही है। विधायक ने बताया कि लाडा के तहत एसजेवीएनएल द्वारा अब तक करीब 9 करोड़ रुपए ही जारी किए गए हैं, जो पूरी तरह खर्च भी नहीं हो पाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिंदला, मंगन और बेलूधांक के लिए सड़क का काम शुरू होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं बच्चे
इस प्रदर्शन में पहुंचे मंगन, परलोग और बेलूधांक क्षेत्र के स्कूली बच्चों ने अपनी दर्दनाक कहानी बयां की। बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन 4 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है और इसके बाद सतलुज नदी पर बने खतरनाक झूलापुल को पार करना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह सफर जानलेवा हो जाता है। बच्चों ने मांग की कि हमें सड़क चाहिए, ताकि हम सुरक्षित स्कूल जा सकें।
प्रभावित क्षेत्र की 4 प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें बुनियादी अधिकारों से जुड़ी हैं। उन्होंने सतलुज नदी पर लोहे के पुल का निर्माण, प्रभावित गांवों तक पक्की सड़क की सुविधा, क्षेत्र में पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना और परियोजना में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर की मांग उठाई।
काम शुरू नहीं हुआ तो ठप्प करेंगे परियोजना
धरने के अंत में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और एसजेवीएनएल प्रबंधन को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने अल्टीमेटम दिया है कि यदि आज से मरौला से बिंदला तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण परियोजना स्थल पर जाकर एसजेवीएनएल के कार्य को पूरी तरह से बाधित कर देंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब विकास कार्य केवल कागजों या आश्वासनों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने चाहिए।
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