Edited By Swati Sharma, Updated: 11 Jul, 2026 11:02 AM

Shimla News : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संजौली कॉलेज के पास बोथवेल इलाके में शनिवार तड़के ज़बरदस्त भूस्खलन हुआ, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई और कई घर खतरे में पड़ गए। यह घटना सुबह करीब 4:00 बजे हुई, जब ज़्यादातर लोग सो रहे थे।...
Shimla News : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संजौली कॉलेज के पास बोथवेल इलाके में शनिवार तड़के ज़बरदस्त भूस्खलन हुआ, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई और कई घर खतरे में पड़ गए। यह घटना सुबह करीब 4:00 बजे हुई, जब ज़्यादातर लोग सो रहे थे। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन भूस्खलन ने प्रभावित इलाके में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
कई घरों तक जाने का रास्ता बंद
अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क के नीचे बनी रिटेनिंग वॉल (दीवार) के ढहने के बाद संजौली कॉलेज जाने वाली सड़क पर भूस्खलन हुआ। मलबा और ढीली मिट्टी नीचे की ओर बने रिहायशी घरों की तरफ खिसक गई, जिससे कई घरों तक जाने का रास्ता बंद हो गया। निवासियों ने बताया कि कम से कम तीन-चार इमारतें अब खतरे के दायरे में हैं और आशंका है कि अगर तुरंत बचाव के उपाय नहीं किए गए तो मिट्टी के और खिसकने से बड़ी आपदा आ सकती है। भूस्खलन के तुरंत बाद, डरे हुए निवासी अपने घरों से बाहर निकल आए और मदद का इंतज़ार करते हुए घंटों बारिश में खड़े रहे। उन्होंने बताया कि अधिकारियों से बार-बार संपर्क करने के बाद, आखिरकार पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और परिवारों को एहतियात के तौर पर अपने घर खाली करने की सलाह दी गई। हालांकि, कई प्रभावित निवासियों का कहना था कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है और वे इस बात को लेकर परेशान हैं कि कहां जाएं।
स्थानीय लोगों ने लगाया ये आरोप
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वे सुबह से ही पार्षद, विधायक और मेयर समेत जन प्रतिनिधियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनके फोन का कोई जवाब नहीं मिला और कोई भी चुना हुआ प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। उन्होंने ज़िला प्रशासन से तुरंत राहत देने, निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आगे के नुकसान को रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाने की अपील की है। निवासियों ने यह भी दावा किया कि नगर निगम ने इलाके में एक निजी निर्माण परियोजना को मंज़ूरी दी थी, जिसमें पहाड़ी की बड़े पैमाने पर खुदाई शामिल थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार बारिश से खोदी गई ढलान कमज़ोर हो गई, जिससे आखिरकार भूस्खलन हुआ। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए और इलाके का विस्तृत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाए।
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