Edited By Vijay, Updated: 17 Sep, 2026 06:14 PM

अगर हौसले बुलंद हों और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी देश सेवा के सर्वोच्च मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जिले की बेटी कंचन शर्मा ने।
बिलासपुर (बंशीधर): अगर हौसले बुलंद हों और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी देश सेवा के सर्वोच्च मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जिले की बेटी कंचन शर्मा ने। घुमारवीं उपमंडल के हरलोग क्षेत्र के पाल्टी गांव की रहने वाली कंचन शर्मा सैन्य नर्सिंग सेवा में पदोन्नत होकर कैप्टन बन गई हैं। इसके साथ ही वह हरलोग क्षेत्र की पहली महिला कैप्टन बनने का गौरव हासिल कर चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले में हर्ष का माहौल है।
स्कूली शिक्षा के दौरान ही निर्धारित कर लिया था लक्ष्य
ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं कंचन शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चलेहली से हुई है। स्कूली शिक्षा के दौरान ही उन्होंने सेना में जाकर देश सेवा करने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने सैन्य नर्सिंग सेवा में प्रवेश पाया। वर्ष 2024 में उनका चयन बतौर लैफ्टिनैंट हुआ था। सेना में अपनी जिम्मेदारियों का उत्कृष्ट निर्वहन करते हुए, अब उन्होंने कैप्टन के पद पर पदोन्नति प्राप्त की है।
मुंबई के अस्पताल में दे रहीं सेवाएं
वर्तमान में कैप्टन कंचन शर्मा मुंबई स्थित भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां वह एक सैन्य अधिकारी के रूप में मरीजों की चिकित्सा और देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। उनकी यह यात्रा सेना में अपना भविष्य बनाने का सपना देखने वाले ग्रामीण युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। कंचन अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने सास-ससुर और पति को देती हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया है।
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