Sirmaur News: नदी की अधूरी सुरक्षा दीवार और बिजली संकट से बढ़ी कालाअम्ब के उद्योगपतियों की टैंशन, प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

Edited By Vijay, Updated: 16 Jun, 2026 03:08 PM

kalaamb entrepreneurs sought help from the administration

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र कालाअम्ब में बुनियादी सुविधाओं की कमी और लचर बिजली आपूर्ति से उद्योगपतियों में रोष है। इन गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए लघु उद्योग भारती (कालाअम्ब इकाई) के अध्यक्ष अखिल महेश्वरी के नेतृत्व में एक...

नाहन (आशु): हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र कालाअम्ब में बुनियादी सुविधाओं की कमी और लचर बिजली आपूर्ति से उद्योगपतियों में रोष है। इन गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए लघु उद्योग भारती (कालाअम्ब इकाई) के अध्यक्ष अखिल महेश्वरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सिरमौर के कार्यकारी उपायुक्त एलआर वर्मा से मुलाकात की। उद्योगपतियों ने प्रशासन को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर आधारभूत ढांचे, सुरक्षा, बिजली और डीजल आपूर्ति से जुड़े तीन बड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए।

बरसात सिर पर और अधूरी है मारकंडा नदी की सुरक्षा दीवार
उद्योगपतियों ने बताया कि कालाअंब में मारकंडा नदी के किनारे उद्योगों को बाढ़ से बचाने के लिए करीब 80 लाख रुपए की लागत से एक सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू हुआ था। इस पर 55 लाख रुपए खर्च कर काम भी हुआ, लेकिन अब यह काम बीच में ही रोक दिया गया है। उद्योगपतियों ने चिंता जताते हुए कहा कि बरसात का मौसम सिर पर है। अगर समय रहते दीवार का अधूरा हिस्सा पूरा नहीं किया गया, तो नदी के तेज बहाव में अब तक हुआ निर्माण भी बह जाएगा और आसपास के उद्योगों में भारी तबाही मच सकती है।

ब्लैक मैंगो के पास खुली नाली दे रही हादसों को न्यौता 
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कालाअंब से ब्लैक मैंगो के बीच बनी नाली पूरी तरह से खुली है और उस पर स्लैब नहीं डाले गए हैं। इस सड़क से रोजाना भारी वाहनों और औद्योगिक कर्मचारियों की आवाजाही होती है। बरसात के समय यह खुली नाली किसी बड़े हादसे या दुर्घटना का कारण बन सकती है। उद्योगपतियों ने जनहित में इस पर तुरंत स्लैब (कवर) डालने की मांग की है।

बिजली कटौती से जूझ रहा औद्योगिक क्षेत्र, ऊपर से डीजल लिमिट की मार
कालाअम्ब औद्योगिक क्षेत्र इस वक्त भारी बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति से जूझ रहा है। उत्पादन चालू रखने के लिए उद्योग पूरी तरह जनरेटरों पर निर्भर हैं। केंद्र सरकार के पैट्रोलियम मंत्रालय के नियमानुसार रिटेल पंपों से एक दिन में केवल 200 लीटर हाई स्पीड डीजल ही खरीदा जा सकता है। अखिल महेश्वरी ने स्पष्ट किया कि 200 लीटर डीजल से उद्योगों की जरूरत पूरी नहीं हो सकती, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि या तो निर्बाध बिजली दी जाए या फिर सक्षम प्राधिकारी के जरिए उद्योगों को उनकी जरूरत के हिसाब से डीजल खरीदने की विशेष अनुमति मिले।

उद्योगों की तरक्की से जुड़ी है हजारों परिवारों की रोजी-रोटी
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अखिल महेश्वरी ने जोर देते हुए कहा कि उद्योग किसी भी क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ होते हैं। हजारों परिवारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर इनसे जुड़ी है। ऐसे में उद्योगों को सुरक्षित माहौल, पक्का इंफ्रास्ट्रक्चर और बिना रुकावट बिजली मिलना बेहद जरूरी है।

कार्यकारी उपायुक्त ने अधिकारियों को जारी किए दिशा-निर्देश 
कार्यकारी उपायुक्त एलआर वर्मा ने उद्योगपतियों की सभी समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को फोन पर दिशा-निर्देश जारी किए और खुली नाली व सुरक्षा दीवार का काम जल्द निपटाने को कहा। वहीं, डीजल कोटा बढ़ाने के मुद्दे पर उन्होंने सरकारी अधिसूचना की समीक्षा कर नियमानुसार उचित कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया है। प्रशासन के इस सकारात्मक रवैये के बाद उद्योगपतियों को उम्मीद बंधी है कि कालाअम्ब की इन लंबित समस्याओं का जल्द ही स्थायी समाधान निकलेगा।

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