Himachal : मछली पालन से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर, PMMSY के तहत मिल रहा 40 से 60% तक अनुदान

Edited By Swati Sharma, Updated: 13 Jul, 2026 05:21 PM

himachal fish farming to transform the rural economy

Una News : पारंपरिक खेती के साथ अब मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत जिला ऊना में चालू वित्त...

Una News : पारंपरिक खेती के साथ अब मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत जिला ऊना में चालू वित्त वर्ष के दौरान नए तालाबों के निर्माण, मछली बीज एवं फीड की व्यवस्था तथा मछली उत्पादों के सुरक्षित परिवहन के लिए 40 से 60 प्रतिशत तक वित्तीय अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है। मत्स्य पालन विभाग ऊना के सहायक निदेशक विवेक शर्मा ने बताया कि योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्गों एवं सभी वर्गों की महिलाओं को 60 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। इससे सीमित संसाधनों वाले किसान भी कम लागत में इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकेंगे।

तालाब निर्माण के साथ पहले वर्ष के बीज और फीड पर भी सहायता

सहायक निदेशक ने बताया कि इस योजना की विशेषता यह है कि सहायता केवल तालाब निर्माण तक सीमित नहीं है। विभाग द्वारा पहले वर्ष के लिए गुणवत्तापूर्ण मछली बीज और फीड (चारा) उपलब्ध कराने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे शुरुआती निवेश का बोझ कम होगा और किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि मत्स्य उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और मछलियों को ताजा अवस्था में बाजार तक पहुँचाने के उद्देश्य से परिवहन सुविधाओं को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके तहत आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल तथा आइस बॉक्स युक्त थ्री-व्हीलर की खरीद पर भी 40 से 60 प्रतिशत तक के अनुदान का प्रावधान है। इससे उत्पादकों की बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और वे सीधे बाजार से जुड़कर अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे।

जलभराव वाली भूमि बनेगी अतिरिक्त आय का साधन

विवेक शर्मा ने बताया कि जिला ऊना के अनेक निचले क्षेत्रों में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या रहती है, जिसके कारण किसान वर्ष में केवल एक फसल ही ले पाते हैं। ऐसी भूमि को अब मत्स्य पालन के लिए उपयोग में लाकर किसान बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक तरीके से किया गया मछली पालन पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक साबित हो रहा है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का माध्यम बन सकता है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई पहल

इस योजना में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत ग्रामीण महिलाएं अपने घर के आंगन या उपलब्ध स्थान पर बैकयार्ड सजावटी (ऑर्नामेंटल) मछली पालन इकाई स्थापित कर सकती हैं। इस इकाई की स्थापना के लिए भी महिलाओं को 60 प्रतिशत तक विशेष अनुदान दिया जा रहा है। कम स्थान और सीमित निवेश में शुरू होने वाला यह व्यवसाय महिलाओं के लिए नियमित आय और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

योजना के लाभ के लिए यहां कर सकतें है आवेदन

सहायक निदेशक ने बताया कि योजना का लाभ लेने, विस्तृत जानकारी प्राप्त करने अथवा आवेदन करने के इच्छुक किसान, युवा एवं महिलाएं किसी भी कार्यदिवस पर सहायक निदेशक, मत्स्य विभाग, ऊना (पुराने डीएवी स्कूल के समीप) या वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी कार्यालय, कार्प बीज फार्म, दियोली (गगरेट) में संपर्क कर सकतें हैं।

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