सुक्खू सरकार के प्रयासों से बदली बागवानी की तस्वीर, HP शिवा परियोजना से संवर रही किसानों की तकदीर

Edited By Swati Sharma, Updated: 09 Aug, 2026 12:15 PM

picture of horticulture changed due to efforts of sukhu government

Una News : जिस जमीन पर कभी पानी की कमी और जंगली जानवरों के कारण खेती करना मुश्किल था, आज उसी जमीन पर ‘श्वेता’ और ‘ललिता’ किस्म के अमरूद की फसल लहलहा रही है। बंगाणा की ग्राम पंचायत बौल के 66 वर्षीय बागवान अजमेर सिंह ने एचपी शिवा परियोजना के सहयोग से...

Una News : जिस जमीन पर कभी पानी की कमी और जंगली जानवरों के कारण खेती करना मुश्किल था, आज उसी जमीन पर ‘श्वेता’ और ‘ललिता’ किस्म के अमरूद की फसल लहलहा रही है। बंगाणा की ग्राम पंचायत बौल के 66 वर्षीय बागवान अजमेर सिंह ने एचपी शिवा परियोजना के सहयोग से अपनी जमीन को बागवानी के लिए विकसित किया। अब उनकी बगिया में तैयार अमरूद स्थानीय बाजार से आगे हिमाचल की सीमा पार कर मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश तक पहुंच रहे हैं।

25 कनाल से शुरू हुई अमरूद की खेती आज करीब 125 कनाल तक फैल चुकी है। अजमेर सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी बगिया से करीब 25 क्विंटल अमरूद का उत्पादन हुआ। उन्होंने पूरी फसल मुरादाबाद के व्यापारी दिनेश कुमार को 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची, जिससे करीब 1.25 लाख रुपये की आय हुई। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें लगभग 50 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। अजमेर सिंह ने बताया कि इस उपलब्धि से उनका उत्साह बढ़ा है और अब वे बागवानी का दायरा और बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्हें इस वर्ष उत्पादन और आय, दोनों में वृद्धि की उम्मीद है। सफलता की यह कहानी मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए फल आधारित खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की बानगी है। एचपी शिवा परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

परियोजना से मिला बागवानी विस्तार का आधार

अजमेर सिंह ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना के तहत उनकी भूमि का समतलीकरण किया गया और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाई गई। इससे पानी की समस्या दूर हुई और भूमि को वैज्ञानिक तरीके से बागवानी के लिए विकसित करने में मदद मिली। बेहतर परिणाम मिलने के बाद उनका भरोसा बढ़ा और उन्होंने धीरे-धीरे बागवानी का विस्तार किया।

सरकारी सहयोग से बदली जमीन की तस्वीर

अजमेर सिंह ने बताया कि उद्यान विभाग के सहयोग से उन्हें गुणवत्तापूर्ण पौधों के साथ ड्रिप सिंचाई प्रणाली, केंचुआ खाद, मल्चिंग सामग्री, कंपोजिट फेंसिंग तथा आवश्यक कृषि दवाइयां उपलब्ध करवाई गईं। इन सुविधाओं और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन से भूमि को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने तथा फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिली।

प्रशिक्षण से मिली वैज्ञानिक बागवानी की समझ

सफल बागवानी के लिए अजमेर सिंह ने उद्यान विभाग के माध्यम से हमीरपुर स्थित नेरी कॉलेज में पांच दिवसीय प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पौधों की छंटाई, रोगों की पहचान एवं उपचार तथा बागवानी के वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी हासिल की। उद्यान विभाग के अधिकारी भी समय-समय पर उनके क्लस्टर का निरीक्षण कर तकनीकी सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

बागवानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन रही एचपी शिवा परियोजना

उपनिदेशक उद्यान विभाग ऊना डॉ. के.के. भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार की 1292 करोड़ रुपये की एचपी शिवा परियोजना प्रदेश में फल आधारित खेती को बढ़ावा देने और किसानों-बागवानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान बंगाणा विकास खंड में 15 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 17 हजार उच्च गुणवत्ता वाले अमरूद के पौधे लगाए गए। वहीं, वर्ष 2025-26 में 50 हेक्टेयर भूमि पर अमरूद, मौसमी और माल्टा के लगभग 55 हजार पौधों का रोपण किया गया है। परियोजना का विस्तार जिले के अन्य क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत क्लस्टर आधारित भूमि विकास, गुणवत्तापूर्ण फलदार पौधे, कंपोजिट फेंसिंग, ड्रिप इरिगेशन और अन्य सुविधाएं किसानों को शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुरूप जिले में एचपी शिवा परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। परियोजना के माध्यम से किसानों को फलदार पौधों के साथ सिंचाई, तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाकर उन्हें वैज्ञानिक बागवानी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा करना भी सरकार की प्राथमिकता है। फल आधारित खेती को बढ़ावा देकर कृषि एवं बागवानी आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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