Himachal: परीक्षा में डमी कैंडिडेट बिठाकर पाई बैंक की नौकरी, लाखों का वेतन और लोन भी डकारा; अब CBI ने दर्ज की FIR

Edited By Vijay, Updated: 09 Sep, 2026 01:27 PM

fraud case in himachal

हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान की क्षेत्रीय भर्ती परीक्षा में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। डमी उम्मीदवार (सॉल्वर) बिठाकर बैंक में नौकरी हासिल करने वाले राजस्थान निवासी दो बर्खास्त बैंक कर्मियों....

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान की क्षेत्रीय भर्ती परीक्षा में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। डमी उम्मीदवार (सॉल्वर) बिठाकर बैंक में नौकरी हासिल करने वाले राजस्थान निवासी दो बर्खास्त बैंक कर्मियों और अन्य अज्ञात लोक सेवकों व निजी व्यक्तियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की एंटी-करप्शन ब्रांच शिमला ने एफआईआर दर्ज की है। इन शातिरों ने न केवल योग्य उम्मीदवारों का हक मारा, बल्कि बैंक को वेतन और लोन के रूप में लाखों रुपये की चपत भी लगाई है।

बायोमीट्रिक री-वैरीफिकेशन से खुला धोखाधड़ी का राज
जानकारी के अनुसार इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आईबीपीएस ने कर्मचारियों का आंतरिक बायोमीट्रिक पुनः सत्यापन  करवाया। जांच में पाया गया कि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के समय दर्ज किए गए फिंगरप्रिंट्स, फोटोग्राफ और हस्ताक्षर इन दोनों कर्मचारियों के वास्तविक डाटा से बिल्कुल भी मेल नहीं खा रहे थे। साफ हो गया कि दोनों ने अपनी जगह परीक्षा देने के लिए सॉल्वरों का इस्तेमाल किया था।

एक ने बगस्याड़ शाखा तो दूसरे ने पांगणा शाखा में ली थी जॉइनिंग 
फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने वाले आरोपियों में रविंद्र मीणा निवासी करौली, राजस्थान और जितेंद्र कुमार मीणा निवासी सवाई माधोपुर, राजस्थान शामिल हैं।  इन पर वेतन और बैंक लोन के जरिए लाखों रुपए का गबन करने का भी आरोप है। रविंद्र मीणा ने वर्ष 2023 की परीक्षा के आधार पर 12 फरवरी 2024 को मंडी जिले की बगस्याड़ शाखा में ऑफिस असिस्टैंट के पद पर जॉइनिंग ली थी। अपनी बर्खास्तगी तक इसने बैंक से करीब 11,10,826 रुपए का वेतन प्राप्त किया। इसके अलावा 3 लाख रुपए का बैंक लोन भी लिया, जिसमें से 2,28,288 रुपए की देनदारी अभी भी बैंक की ओर बकाया है। जितेंद्र कुमार मीणा ने वर्ष 2022 की परीक्षा के आधार पर 1 जुलाई 2023 को मंडी जिले के करसोग स्थित पांगणा शाखा में जॉइनिंग ली थी। बर्खास्त किए जाने तक इसने 14,46,146 रुपए का वेतन प्राप्त किया। इसके अलावा 5 लाख और 3 लाख (कुल 8 लाख रुपए) के दो अलग-अलग लोन लिए, जिनमें से 7,45,865 रुपए अभी भी बकाया हैं।

सीबीआई ने इन धाराओं के तहत दर्ज किया मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने दोनों पूर्व बैंक कर्मचारियों, अन्य अज्ञात अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 419, 420, 468, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 व 7ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की आगामी जांच सीबीआई के निरीक्षक कुलदीप चंद को सौंपी गई है।

संगठित सॉल्वर गैंग की तलाश तेज
सीबीआई अब इस पूरे सिंडिकेट की तह तक जाने में जुट गई है। जांच एजैंसी का मानना है कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंधमारी महज 2 कर्मचारियों का काम नहीं हो सकता। इसके पीछे एक बड़े और संगठित सॉल्वर गैंग के सक्रिय होने की पूरी संभावना है। आगामी जांच में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था से जुड़े लोगों और गैंग के सरगनाओं को लेकर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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